- कैंटीन की बिक्री बढ़ाने के लिए राशन में हो रही बेतहाशा कटौती
- जेल अधीक्षक की अवैध वसूली से बंदियों का जीना हुआ मुहाल
- आत्महत्या की घटना के बाद हुए कई सनसनीखेज खुलासे
लखनऊ। सीतापुर जेल में विचाराधीन बंदी के आत्महत्या किए जाने के बाद कई सनसनीखेज खुलासे हुए है। नई जेल अधीक्षक की अवैध वसूली से बंदियों का जीना मुहाल हो गया है। जेल में कैंटीन की बिक्री बढ़ाने के लिए राशन की बेतहाशा कटौती की जा रही है। इस कटौती की वजह से गरीब बंदियों को भरपेट भोजन के लिए तरसना पड़ रहा है। अधीक्षक और जेल डॉक्टर मिलकर विशेष आहार के नाम पर प्रतिमाह लाखों का गोलमाल कर रहे है। उधर विभाग के आला अफसर इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आ रहे हैं। बीते सोमवार को सीतापुर जेल में विचाराधीन बंदी मुनेंद्र पुत्र रमेश ने बैरक में फांसी लगाकर जान दे दी।
संदिग्ध परिस्थितियों में हुई इस मौत ने जेल की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए। सूत्रों की माने तो जेल में बंदियों का जमकर शोषण और उत्पीड़न किया जा रहा है। इस जेल में निरीह और गरीब बंदियों की संख्या अधिक है। जेल प्रशासन के अधिकारी कैंटीन की बिक्री में बढ़ोत्तरी करने के लिए बंदियों के राशन में जमकर कटौती कर रहे है। कटौती के राशन की खपत कंटीन में बनने वाली खानपान की वस्तुओं में की जा रही है। अधिकारी कैंटीन की बिक्री से जेब भरने में जुटे हुए है वहीं आर्थिक रूप से निरीह गरीब बंदी भरपेट भोजन के लिए तरस रहे हैं।
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सूत्र बताते है कि जेल में विशेष आहार के नाम पर प्रतिमाह लाखों रुपए के बारे न्यारे किए जा रहे है। जेलों में बुजुर्ग एवं शारीरिक रूप से अस्वस्थ बंदियों को विशेष आहार दिए जाने की व्यवस्था सुनिश्चित की गई। इसको अधिकारियों ने कमाई का जरिया बना लिया है। अधीक्षक और जेल डॉक्टर की साठगांठ से जेल के उन बंदियों को विशेष आहार ( दूध, दही, सेब, केला, अनार, अंडा इत्यादि) लिखा जा रहा है जो न तो बीमार हैं और न ही अस्वस्थ बुजुर्ग है। स्वस्थ बंदियों को विशेष आहार लिखकर कमाई की जा रही है। विशेष आहार लिखने के लिए बंदियों से ढाई सौ से पांच सौ रुपए तक वसूल किया जा रहा है। सूत्रों की माने तो विशेष आहार के लिए ठेकेदार से मंगवाए जाने वाले फल इत्यादि में कमीशन के लिए फर्जी बिलिंग की जा रही है। उधर इस संबंध में जब जेल अधीक्षक प्रीति यादव से सीयूजी (9454418246) नंबर पर बात करने का प्रयास किया गया तो उनका फोन नहीं उठा।
परिक्षेत्र डीआईजी को नहीं दिख रहा जेल का भ्रष्टाचार
सीतापुर जिला जेल में व्याप्त भ्रष्टाचार लखनऊ जेल परिक्षेत्र के DIG को दिखाई ही नहीं पड़ता है। यही वजह है कि जेल में हाता, मशक्कत, गिनती कटवाने, मनमाफिक बैरक में जाने और मुलाक़ात के लिए जमकर वसूली की जा रही है। इस जेल में अधिकारी मस्त, बंदी त्रस्त, जेल की व्यवस्था ध्वस्त वाली कहावत एकदम फिट बैठती है। मजे की बात यह है कि इस विभाग में अधिकारी CUG फोन उठाते ही नहीं है। कई अधिकारियों ने अपना CUG नंबर फोन मातहत कर्मियों तक को सौंप रखा है।
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2 thoughts on “सीतापुर जेल में भरपेट भोजन के लिए तरस रहे बंदी!”
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