- बंगाल में बीजेपी की जीत के ‘साइलेंट स्ट्रैटेजिस्ट सुनील बंसल
- अपने संगठनात्मक कमाल के बीते BJP को दिलाया बंगाल का राज
डीपी शुक्ल
लखनऊ। वो ज्यादा बात नहीं करते लेकिन अपने लक्ष्य को साधने की साधना में हमेशा जुटे रहते हैं। जहां पार्टी को ज्यादा जरूरत हो, वहीं उन्हें लगाया जाता है। बंगाल इसका जीता जागता उदाहरण है। इसके पहले वो साल 2014, 2017 और 2022 के चुनाव में यूपी के कमांडर थे। साल 2024 में कमान धर्मपाल सिंह के पास गई तो BJP लोकसभा में 33 सीटों पर सिमट गई। साल 2019 के लोकसभा चुनाव में 62 सांसदों वाली टीम का 2024 में 33 पर जाना सुनील बंसल के संगठनात्मक वैल्यू की मिसाल है। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में अगर यही टीम रही तो BJP को बुरी हार का सामना भी करना पड़ सकता है।
पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी की चुनावी सफलता के पीछे जहां बड़े नेताओं के चेहरे चर्चा में हैं, वहीं संगठन के स्तर पर एक नाम तेजी से उभरकर सामने आया है। वो हैं सुनील बंसल। बीजेपी के पश्चिम बंगाल प्रभारी के तौर पर बंसल ने जिस तरह जमीनी स्तर पर रणनीति को लागू किया, उसे पार्टी के भीतर “मास्टरस्ट्रोक” माना जा रहा है। अमित शाह के बेहद करीबी माने जाने वाले बंसल ने बंगाल में संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत करने पर खास जोर दिया। टिकट वितरण से लेकर कार्यकर्ताओं की तैनाती तक, हर निर्णय में उनकी अहम भूमिका रही। कहा जाता है कि सुनील क्षेत्रवार कार्यकर्ताओं के नाम तक याद रखते हैं और हर विधानसभा क्षेत्र की बारीक जानकारी रखते हैं।
‘ग्राउंड मैनेजमेंट’ में महारत उन्हें सभी नेताओं से अलग बनाती है। बंसल की कार्यशैली की सबसे बड़ी खासियत है, बिना शोर-शराबे के काम करना। रैली की भीड़ से लेकर बूथ प्रबंधन तक, हर व्यवस्था पर उनकी पैनी नजर रहती है। महीनों तक बंगाल में डटे रहकर उन्होंने संगठन को नई ऊर्जा दी और कार्यकर्ताओं के बीच समन्वय स्थापित किया। उन्होंने यूपी मॉडल का सफल प्रयोग बंगाल में किया। साल 2014 से वर्ष 2022 तक उत्तर प्रदेश में संगठन महामंत्री रहे बंसल ने वहां भी बीजेपी की ऐतिहासिक जीत में बड़ी भूमिका निभाई थी। यूपी में उनके कार्यकाल के दौरान पार्टी ने न सिर्फ सत्ता हासिल की, बल्कि 2022 में एंटी-इंकंबेंसी के बावजूद दोबारा सरकार बनाने में भी सफलता पाई। इसी “यूपी मॉडल” को उन्होंने बंगाल में लागू करने की कोशिश की।
‘राजनीति के जादूगर’ की छवि
पार्टी के भीतर सुनील बंसल को “राजनीति का जादूगर” कहा जाता है। जिस राज्य की जिम्मेदारी उन्हें दी गई, वहां संगठन को मजबूत करने में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। हालांकि वे मीडिया से दूरी बनाए रखते हैं और इंटरव्यू या प्रचार से बचते हैं, लेकिन उनके परिणाम खुद उनकी रणनीति की कहानी कहते हैं।
हाईकमान का भरोसेमंद चेहरा
बीजेपी नेतृत्व, खासकर अमित शाह का भरोसा बंसल पर साफ दिखाई देता है। माना जाता है कि कई अहम फैसले शाह के मार्गदर्शन में बंसल ही जमीनी स्तर पर लागू करते हैं। बंगाल में बीजेपी की सफलता ने एक बार फिर उन्हें पार्टी के सबसे प्रभावी संगठनकर्ताओं में शामिल कर दिया है।
नया लुक के व्हॉट्सऐप चैनल से जुड़ने के लिए यहाँ क्लिक करें
Google Play Store: https://play.google.com/store/apps/details?id=com.app.nayalooknews
