- 20 साल तक सत्ता में रही बीजेपी अपना एक भी चेहरा खड़ा नहीं कर पायी,
- विचारधारा को तिलांजलि देती दिख रही भाजपा,
- सम्राट चौधरी लालू के पाठशाला के ही शिष्य है, बिहार की राजनीति लालू के इर्द दर्द ही घूमेगी : तेजस्वी यादव
रंजन कुमार सिंह
जिस लालू यादव की पॉलिटिकल पाठशाला को कभी खत्म करने की कसम बीजेपी नेताओं और नरेंद्र मोदी के तरफ से खाई गई थी, आज उसी पाठशाला का छात्र भाजपा का पहला मुख्यमंत्री बनने जा रहा है। 20 साल, जी हाँ पूरे 20 साल तक जेडीयू के साथ सत्ता में रहने के बाद भी बीजेपी अपना एक खुद का चेहरा खड़ा नहीं कर पाई।जो आरएसएस और भाजपा से हो। ये कैसी राजनीति है? और के दौर में, जहाँ पार्टी ने पूरे देश में नए चेहरे गढ़े,वहीं बिहार में आज भी आयातित नेतृत्व पर भरोसा करना पड़ रहा है। भाजपा का इतना बड़ा नेटवर्क फिर भी एक मजबूत, जमीनी, सर्वमान्य मुख्यमंत्री चेहरा भाजपा में नहीं है? क्या बिहार में बीजेपी सिर्फ सत्ता की सवारी कर रही थी?क्या संगठन ज़मीन पर उतना मजबूत नहीं, जितना मंच से दिखता है? या फिर सच्चाई ये है कि बिहार में आज भी विचारधारा नहीं, व्यक्ति जीतता है? ये सवाल बीजेपी से भी है, और उन समर्थकों से भी, जो हर चुनाव में नए बिहार का सपना देखते हैं।
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बिहार की राजनीति में सबसे बड़ा ट्विस्ट यही है।लड़ाई विचारों की होती है,लेकिन जीत अक्सर दूसरे के बनाए खिलाड़ी की होती है। बिहार भाजपा के समस्त नेताओं को भावभीनी श्रद्धांजलि और आरएसएस को अब अपना “हिंदुत्व का पाठशाला” बिहार में बंद करके नागपुर लेकर चला जाना चाहिए। आज भी बिहार में जेपी के चेलाओं की ही राजनीति चलती है। लालू प्रसाद यादव की ‘राजनीतिक पाठशाला’ (RJD) से अपने करियर की शुरुआत करने वाले सम्राट चौधरी, 14 अप्रैल 2026 तक बिहार के 24वें मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त हो चुके हैं। उनका बैकग्राउंड एक प्रभावशाली राजनीतिक परिवार का है और वे कोइरी-कुशवाहा (OBC) समुदाय से आते हैं। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के एक दिग्गज राजनेता रहे हैं, जो सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। उनकी माता पार्वती देवी भी तारापुर क्षेत्र से विधायक रही हैं। उनका जन्म 16 नवंबर 1968 को मुंगेर जिले के लखनपुर गांव में हुआ था। उन्होंने 1990 के दशक में लालू प्रसाद यादव के सानिध्य में सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। 1999 में राबड़ी देवी सरकार में वे कृषि मंत्री बने, जो उनके तेजी से उभरते राजनीतिक करियर का संकेत था। 2000 में खगड़िया के परबत्ता विधानसभा क्षेत्र से उन्होंने पहली बार विधायक का चुनाव जीता।
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लालू यादव की पार्टी से अलग होने के बाद, वे जनता दल यूनाइटेड (JDU) में शामिल हुए और 2014 में नीतीश कुमार सरकार में शहरी विकास मंत्री बने। 2017-2018 में वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल हो गए। मार्च 2023 में उन्हें बिहार भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया। नीतीश कुमार को सत्ता से बेदखल करने के संकल्प के साथ उन्होंने सिर पर विशेष पगड़ी (मुरैठा) बांधनी शुरू किया था, जिसे जुलाई 2024 में अयोध्या में सरयू नदी के तट पर उतारकर भगवान राम को समर्पित किया।
28 जनवरी 2024 को वे NDA सरकार में उपमुख्यमंत्री बने। 2025 के विधानसभा चुनाव में जीत के बाद, 14 अप्रैल 2026 को वे बिहार के मुख्यमंत्री बने। इस संदर्भ में तेजस्वी यादव ने तंज किया कि: सम्राट चौधरी लालू यादव की पाठशाला के ही शिष्य हैं, इसलिए बिहार की राजनीति लालू यादव के इर्द-गिर्द ही घूमती रहती है।
