भारतीय टेलीविजन इतिहास में रामायण एक ऐसा नाम है, जिसे कभी भुलाया नहीं जा सकता। इस शो ने न केवल धार्मिक भावनाओं को मजबूती दी, बल्कि इसके कलाकारों को भी एक विशेष पहचान दी। लेकिन इस चमक-दमक के बीच कुछ चेहरे ऐसे भी रहे, जो धीरे-धीरे समय के साथ ओझल हो गए। इन्हीं में से एक हैं विजय कविश, जिन्होंने इस महागाथा में तीन अलग-अलग भूमिकाएं निभाईं। भगवान शिव के रूप में उनकी शांत और गंभीर छवि दर्शकों के दिलों में बस गई थी। इसके अलावा उन्होंने ऋषि विश्रवा और महर्षि वाल्मीकि जैसे महत्वपूर्ण किरदार भी निभाए।
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उनकी अभिनय क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने हर किरदार को पूरी तरह अलग पहचान दी। बावजूद इसके, उन्हें वह लोकप्रियता नहीं मिल सकी जो अन्य कलाकारों को मिली। इसका एक कारण यह भी हो सकता है कि मुख्य किरदार निभाने वाले कलाकारों पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया गया, जबकि सहायक लेकिन महत्वपूर्ण भूमिकाएं निभाने वाले कलाकार पीछे छूट गए।
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विजय कविश ने केवल ‘रामायण’ तक ही खुद को सीमित नहीं रखा। उन्होंने अन्य पौराणिक धारावाहिकों और फिल्मों में भी काम किया। लेकिन धीरे-धीरे उन्हें कम मौके मिलने लगे और वे इंडस्ट्री से दूर होते गए। आज वे मुंबई में रहकर निर्देशन और संपादन के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वे डिजिटल माध्यमों के जरिए अपनी रचनात्मकता को जीवित रखे हुए हैं। उनकी कहानी हमें यह सिखाती है कि पहचान चाहे मिले या न मिले, सच्चा कलाकार वही होता है जो हर परिस्थिति में अपनी कला को जिंदा रखता है।
