क्या ‘दीदी’ का करिश्मा फिर भारी पड़ेगा या BJP बनाएगी इतिहास?

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शाश्वत तिवारी
शाश्वत तिवारी

पश्चिम बंगाल की सियासत एक बार फिर निर्णायक मोड़ पर खड़ी है। ऐसे में हर राजनीतिक विश्लेषण, हर सर्वे और हर अनुमान बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। बंगाल की सियासत का हालिया आकलन भी इसी क्रम में एक बड़ा संकेत देता है, और यह संकेत ममता बनर्जी के पक्ष में जाता दिखाई दे रहा है।पश्चिम बंगाल की राजनीति में अगर कोई एक स्थायी तत्व है, तो वह है ममता बनर्जी का प्रभाव। तृणमूल कांग्रेस (TMC) केवल एक राजनीतिक पार्टी नहीं रह गई है, बल्कि वह “दीदी” के व्यक्तित्व के इर्द-गिर्द निर्मित एक भावनात्मक और राजनीतिक ब्रांड बन चुकी है। मौजूदा आकलन के अनुसार, लगभग 48.8% लोग ममता बनर्जी को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं, जो किसी भी लोकतांत्रिक मुकाबले में एक मजबूत जनादेश का संकेत है। यह आंकड़ा केवल लोकप्रियता नहीं दर्शाता, बल्कि यह विश्वास का प्रतीक है, एक ऐसा विश्वास जो वर्षों की राजनीतिक पकड़, जनसंपर्क और जमीनी योजनाओं से बना है।

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दूसरी ओर, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने पिछले चुनावों में बंगाल में जबरदस्त उभार दिखाया था। लेकिन इस बार तस्वीर कुछ धुंधली नजर आती है। अनुमान के अनुसार, बीजेपी को 98 से 108 सीटें मिल सकती हैं, जो बहुमत के जादुई आंकड़े 148 से काफी दूर है। बीजेपी की सबसे बड़ी चुनौती है, राज्य स्तर पर मजबूत और सर्वमान्य नेतृत्व का अभाव।

शुभेंदु अधिकारी जैसे नेताओं के बावजूद पार्टी अभी भी एक ऐसे चेहरे की तलाश में है जो ममता बनर्जी की बराबरी कर सके। इसके अलावा, पार्टी के अंदरूनी मतभेद और गुटबाजी भी उसकी संभावनाओं को कमजोर कर रहे हैं। यह वही बंगाल है, जहां संगठनात्मक एकता और जमीनी पकड़ जीत की कुंजी मानी जाती है।

बंगाल की राजनीति में जातिगत समीकरण उतने स्पष्ट नहीं होते जितने उत्तर भारत में, लेकिन धार्मिक और सामाजिक संतुलन यहां बेहद अहम भूमिका निभाते हैं। मुस्लिम समुदाय, जो राज्य की आबादी का एक बड़ा हिस्सा है, अब भी बड़े पैमाने पर ममता बनर्जी के साथ खड़ा दिखाई देता है। यही समर्थन TMC के वोट शेयर को स्थिर और मजबूत बनाता है।

294 सीटों वाली विधानसभा में बहुमत के लिए 148 सीटें चाहिए। सीटो का मौजूदा अनुमान TMC को 184 से 194 सीटों के बीच रखता है, जो न केवल बहुमत, बल्कि एक मजबूत और स्थिर सरकार की ओर इशारा करता है।

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यह आंकड़ा बताता है कि अगर मौजूदा परिस्थितियां बनी रहती हैं, तो ममता बनर्जी चौथी बार सत्ता में वापसी कर सकती हैं, जो अपने आप में एक राजनीतिक इतिहास होगा। पश्चिम बंगाल का चुनाव केवल सीटों और प्रतिशतों का खेल नहीं है। यह चुनाव नेतृत्व, विश्वास, पहचान और भावनाओं का संगम है।

जहां बीजेपी “परिवर्तन” का नारा लेकर मैदान में है, वहीं TMC “स्थिरता और भरोसे” के साथ जनता के बीच है। इस मुकाबले में फिलहाल पलड़ा ममता बनर्जी की ओर झुकता नजर आ रहा है। लेकिन राजनीति में अंतिम सत्य केवल एक ही होता है, “जनता का फैसला” और बंगाल की जनता किसे चुनती है, यह 29 अप्रैल के बाद ही साफ होगा।

(लेखक स्वतंत्र पत्रकार हैं)

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