एक्स के बाद फेसबुक पर भी एक्शन! कई पेज भारत में बंद, सोशल मीडिया पर उठे ‘डिजिटल इमरजेंसी’ के सवाल

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  • सरकार की आलोचना करने वाले कई फेसबुक पेज अचानक बंद,
  • सोशल मीडिया पर छिड़ी सेंसरशिप बनाम फ्री स्पीच की बहस

नई दिल्ली। भारत में सोशल मीडिया पर सख्ती को लेकर बहस तेज होती जा रही है। पहले एक्स (ट्विटर) पर कई अकाउंट्स को ब्लॉक किया गया और अब फेसबुक पर भी कई पेजों के बंद होने की खबर सामने आई है। इन पेजों में मॉलीटिक्स, नेशनल दस्तक और राजीव निगम जैसे प्लेटफॉर्म शामिल हैं, जो सरकार की नीतियों पर सवाल उठाने, आलोचना करने या व्यंग्यात्मक कंटेंट के लिए जाने जाते थे। बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में ऐसे कई अकाउंट्स और पेजों पर एक के बाद एक कार्रवाई हुई है। इससे सोशल मीडिया यूजर्स के बीच नाराजगी बढ़ी है। कई लोगों ने इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी पर हमला बताते हुए लिखा कि “जो सरकार का समर्थन करेगा, वही बचेगा, बाकी सब बैन कर दिए जाएंगे।” कुछ यूजर्स ने तो इसे ‘डिजिटल इमरजेंसी’ तक करार दे दिया। वरिष्ठ पत्रकार उमाशंकर सिंह ने इस कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कबीर का दोहा याद दिलाया…

“निंदक नियरे राखिए, आंगन कुटी छवाय…”

उन्होंने कहा कि आलोचना व्यक्ति और व्यवस्था दोनों को बेहतर बनाने का काम करती है।  वहीं वरिष्ठ पत्रकार रवीश कुमार ने भी इस पर चिंता जताते हुए कहा कि “हर दिन एक नया चैनल या प्लेटफॉर्म बंद हो रहा है, यह स्थिति चिंताजनक है।” रणविजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार उन पेजों और हैंडल्स पर कार्रवाई कर रही है, जो जमीनी मुद्दों को उठाते हैं और सवाल करते हैं।

पहले एक्स अकाउंट्स पर हुई थी कार्रवाई

इससे पहले एक्स पर भी कई पैरोडी, व्यंग्य और पत्रकारों के अकाउंट्स को भारत में ‘withheld’ कर दिया गया था। इन अकाउंट्स को खोलने पर मैसेज आता है— “Account withheld in IN in response to a legal demand”। यानी कानूनी आदेश के तहत भारत में इन्हें रोका गया है, हालांकि ये अकाउंट्स विदेशों में अब भी देखे जा सकते हैं।

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आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत कार्रवाई

रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कार्रवाई आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत की जा रही है। इस प्रावधान के तहत केंद्र सरकार को अधिकार है कि वह ऐसे कंटेंट को ब्लॉक करने का आदेश दे, जो देश की सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था या विदेशी संबंधों के लिए खतरा माना जाए। सूत्रों के अनुसार, फिलहाल यह अधिकार आईटी मंत्रालय के पास है, लेकिन भविष्य में गृह, रक्षा, विदेश और सूचना-प्रसारण मंत्रालय को भी यह शक्ति देने पर विचार किया जा रहा है। अगर ऐसा होता है, तो सोशल मीडिया कंटेंट पर नियंत्रण और सख्त हो सकता है।

फ्री स्पीच बनाम सेंसरशिप-बढ़ती बहस

लगातार हो रही इन कार्रवाइयों ने देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सेंसरशिप को लेकर नई बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि क्या यह राष्ट्रीय सुरक्षा के तहत जरूरी कदम हैं या फिर आलोचनात्मक आवाजों को दबाने की कोशिश? फिलहाल सरकार की ओर से इन कार्रवाइयों पर विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि क्या इस पर पारदर्शिता बढ़ेगी या सोशल मीडिया पर और सख्ती देखने को मिलेगी।

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