मासिक शिवरात्रि आज: जानिए शुभ मुहूर्त व पूजा विधि और इस व्रत का महत्व

Lord Shiva and Parvati
राजेन्द्र गुप्ता

शिव भक्तों के लिए शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का खास महत्व होता है। वहीं हर महीने वाली पड़ने वाली मासिक शिवरात्रि की पूजा भी काफी अहम होती है। बता दें कि साल में 12 मासिक शिवरात्रि पड़ती है। मान्यता है कि इस दौरान जो कोई भगवान शिव और मां पार्वती की पूजा करता है तो उसे मनपसंदीदा जीवनसाथी जरूर मिलता है। वहीं भगवान शिव और मां पार्वती के आशीर्वाद से जीवन में आने वाली सारी बाधाएं खत्म हो जाती है।

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कब हैं मासिक शिवरात्रि?

बता दें कि हर महीने जब भी कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि आती है तब मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। इस महीने कृष्ण पक्ष के चतुर्दशी तिथि की शुरुआत कल यानी 17 मार्च से हो रही है। तिथि के शुरु होने का समय सुबह 9 बजकर 23 मिनट है। इस तिथि का समापन 18 मार्च को होगा। समापन का समय 8 बजकर 25 मिनट है।

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मासिक शिवरात्रि पूजा शुभ मुहूर्त

बात करें पूजा के शुभ मुहूर्त की तो भगवान शिव की पूजा तो वैसे कभी भी कर सकते हैं लेकिन माना जाता है कि इसके लिए दो मुहूर्त सबसे अच्छे होते हैं। एक मुहूर्त प्रदोष काल वाला होता है। तो वहीं दूसरा निशिता काल माना जाता है। वहीं माना जाता है कि अगर मासिक शिवरात्रि की पूजा निशिता काल में की जाए तो ये और भी शुभ होता है। पंचांग के हिसाब से 17 मार्च की रात का निशिता काल का समय रात में 12 बजकर 7 मिनट से शुरु होतर 12 बजकर 55 मिनट तक चलेगा। पंचांग के हिसाब से पूजा के लिए कुल 48 मिनट का ये शुभ मुहूर्त बहुत ही खास रहने वाला है।

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मासिक शिवरात्रि पूजा विधि

मासिक शिवरात्रि की पूजा विधि आसान तरीके से समझते हैं। बता दें कि इस दिन पूजा करने के लिए सुबह उठकर स्नान करें। साफ-सुथरे कपड़े पहन लें। भगवान शिव की तस्वीर या फिर मूर्ति के आगे व्रत का संकप्ल लें। मंदिर की साफ-सफाई कर लें। भगवान शिव और मां पार्वती की तस्वीर या फिर मूर्ति को चौकी पर कपड़ा बिछाकर रख दें। कोशिश करें कि कपड़ा लाल रंग का ही हो।

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ऐसे करें शिवलिंग का जलाभिषेक

शिवलिंग का जलाभिषेक गंगाजल, दही, दूध, शहद से करें। इसके बाद शिवलिंग पर बेलपत्र और धतूरा चढ़ाएं। ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें। बाद में भगवान शिव की चालीसा का पाठ करें। इसके बाद भूल-चूक होने के लिए माफी मांग लें।

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मासिक शिवरात्रि महत्व

‌पौराणिक कथाओं और मान्यताओं के अनुसार, चतुर्दशी तिथि के दिन भोलेनाथ शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। उस समय विष्णुजी और ब्रह्माजी ने शिवलिंग की सर्वप्रथम पूजा की थी। तभी से इस तिथि को भोलेनाथ के जन्मदिवस के रूप में मनाया जा रहा है। पुराणों के अनुसार, इस शिवरात्रि के व्रत को मां सरस्वती, माता लक्ष्मी, सीता मईया, माता गायत्री और देवी पार्वती ने भी किया था। माना जाता है की इस व्रत को करने से जीवन में सुख-शांति बनी रहती है और बेहद पुण्य फल की प्राप्ति होती है। साथ ही, मासिक शिवरात्रि का व्रत करने से जातक को भगवान शिव की कृपा प्राप्त हो सकती है और दांपत्य जीवन भी खुशहाल रहता है।

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