महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहिष्णुता का अंतरराष्ट्रीय दिवस आज, जानिए इसका इतिहास और महत्व

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 राजेन्द्र गुप्ता

आज पूरी दुनिया में महिला जननांग विकृति (Female Genital Mutilation – FGM) के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है। हर साल 6 फरवरी को मनाए जाने वाले इस दिवस का उद्देश्य इस अमानवीय कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना और महिलाओं के अधिकारों व सम्मान के प्रति समाज को जागरूक करना है। यह दिवस पहली बार 6 फरवरी 2003 को मनाया गया था और तब से लगातार वैश्विक स्तर पर इसके खिलाफ आवाज उठाई जा रही है। आज भी दुनिया के कई देशों में यह प्रथा जारी है, जिसमें सबसे अधिक मामले अफ्रीकी महाद्वीप में देखने को मिलते हैं। संयुक्त राष्ट्र ने लक्ष्य तय किया है कि 2030 तक महिला जननांग विकृति को पूरी तरह खत्म किया जाए।

महिला जननांग विकृति के प्रति शून्य सहिष्णुता का अंतर्राष्ट्रीय दिवस आज आज दुनिया भर में महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जा रहा है। इसे पहली बार छह फरवरी, 2003 ई को मनाया गया था। इसके बाद से हर साल छह फरवरी को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य महिला जननांग विकृति कुप्रथा को जड़ से समाप्त करना और लोगों में महिलाओं के प्रति सम्मान और स्नेह पैदा करना है।

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दुनिया के कई देशों में यह कुप्रथा जारी है। खासकर अफ्रीका महादेश में सबसे अधिक है। इसके लिए यह निर्धारित किया गया है कि 2030 तक महिला जननांग विकृति कुप्रथा को समाप्त किया जाए। क्या है इतिहास इसकी शुरुआत नाइजीरिया की पूर्व राष्ट्रपति और महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता चलाने वाली अभियान की प्रवक्ता Stella Obasanjo ने की। जब उन्होंने 6 फरवरी, 2003 को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता दिवस मनाने की घोषणा की। इसके बाद संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी इसे स्वीकार किया।

इसके लिए 2007 में संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (UNFPA) और संयुक्त राष्ट्र बाल कोष (UNICEF) ने महिला जननांग विकृति उत्पीड़न के खिलाफ संयुक्त अभियान चलाया था। साथ ही सन 2012 ई में संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने एक प्रस्ताव पारित कर 6 फरवरी को महिला जननांग विकृति के खिलाफ शून्य सहनशीलता का अंतरराष्ट्रीय दिवस घोषित कर दिया। महत्व : समाज में महिला और पुरुष दोनों को सामान अधिकार मिलना चाहिए। सदियों से महिलाओं के खिलाफ कई कुप्रथा चली आ रही है, जिन्हें तत्काल समाप्त करने की जरूरत है। महिलाएं किसी भी मामले में पुरुषों से कम नहीं हैं। इसके लिए महिलाओं को समाज में सम्मान मिलना चाहिए। इस कुप्रथा के खिलाफ लोगों को जागरूक करना बेहद जरूरी है। इससे महिलाओं की मानसिक और शारीरिक सेहत पर बहुत बुरा असर पड़ता है।

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