भारतीय क्रिकेट के सबसे जुझारू और यादगार ऑलराउंडरों में शुमार युवराज सिंह ने सालों बाद अपने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने की असली वजह का खुलासा किया है। 2019 में अचानक रिटायरमेंट का ऐलान कर सबको चौंकाने वाले युवराज ने अब भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा के पॉडकास्ट ‘सर्विंग इट अप विद सानिया’ में दिल खोलकर उस दौर की सच्चाई साझा की।
युवराज सिंह का नाम भारतीय क्रिकेट इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। 2007 टी20 वर्ल्ड कप और 2011 वनडे वर्ल्ड कप में भारत की जीत में उनका योगदान अविस्मरणीय रहा। खासतौर पर 2011 वर्ल्ड कप, जहां उन्होंने गेंद और बल्ले दोनों से कमाल करते हुए ‘प्लेयर ऑफ द टूर्नामेंट’ का खिताब जीता। लेकिन इसी टूर्नामेंट के बाद उनकी जिंदगी ने अचानक करवट ली, जब उन्हें कैंसर होने की जानकारी मिली।
करीब एक साल तक अस्पतालों, इलाज और मानसिक संघर्ष से गुजरने के बाद युवराज ने कैंसर को मात दी और मैदान पर वापसी की। हालांकि, वापसी के बाद उनका करियर पहले जैसा नहीं रह पाया। टीम में जगह पक्की नहीं रही, लगातार खुद को साबित करने का दबाव बना रहा और वह चयन के मामले में अंदर-बाहर होते रहे। आखिरकार जून 2019 में उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट से संन्यास लेने का फैसला किया।
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सानिया मिर्जा के पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान युवराज ने कहा कि उनका रिटायरमेंट कोई अचानक लिया गया फैसला नहीं था। यह लंबे समय से चली आ रही शारीरिक थकान और मानसिक दबाव का नतीजा था। उन्होंने स्वीकार किया कि एक समय ऐसा आ गया था, जब क्रिकेट उन्हें खुशी देने के बजाय बोझ लगने लगा था।
युवराज ने कहा कि जब उन्हें खेल में मजा आना बंद हो गया, तब उन्होंने खुद से सवाल किया कि वह आखिर क्यों खेल रहे हैं। उन्हें लगा कि उन्हें न तो पहले जैसा सम्मान मिल रहा है और न ही वह सपोर्ट, जिसकी उन्हें जरूरत थी। हर मैच में खुद को साबित करने की मजबूरी ने क्रिकेट के प्रति उनके जुनून को कम कर दिया।
उन्होंने यह भी बताया कि जिस दिन उन्होंने इंटरनेशनल क्रिकेट छोड़ने का फैसला किया, उसी दिन उन्हें भीतर से सुकून महसूस हुआ। जो मानसिक बोझ वह सालों से ढो रहे थे, वह अचानक उतर गया। युवराज के मुताबिक, रिटायरमेंट के बाद वह दोबारा खुद से जुड़ पाए और जिंदगी को एक नए नजरिए से देखने लगे।
