लखनऊ। महंगाई लगातार बढ़ रही है। बच्चों की पढ़ाई, हेल्थ इंश्योरेंस, रिटायरमेंट प्लानिंग और रोजमर्रा के खर्च आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रहे हैं। ऐसे में टैक्स सेविंग के विकल्पों पर निर्भरता पहले से कहीं ज्यादा बढ़ गई है। सेक्शन 80C उन्हीं टैक्सपेयर्स के लिए सबसे अहम हथियार है, जो निवेश के जरिए अपनी टैक्सेबल इनकम कम करना चाहते हैं। लेकिन बीते 12 सालों से इसकी सीमा जस की तस बनी हुई है, जबकि इस दौरान जीवन यापन की लागत कई गुना बढ़ चुकी है। अब उम्मीद जताई जा रही है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण बजट 2026 में इस लिमिट को दोगुना कर सकती हैं।
सेक्शन 80C क्या है और क्यों है इतना अहम?
सेक्शन 80C के तहत पुराने टैक्स सिस्टम को चुनने वाले लोग कई तरह के निवेश पर टैक्स छूट का लाभ ले सकते हैं, जैसे:
- पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)
- इक्विटी लिंक्ड सेविंग स्कीम (ELSS म्यूचुअल फंड)
- जीवन बीमा प्रीमियम
- नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC)
- पोस्ट ऑफिस सेविंग स्कीम्स
- बच्चों की ट्यूशन फीस (कुछ शर्तों के साथ)
फिलहाल इन सभी निवेशों को मिलाकर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक ही डिडक्शन मिलती है।
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12 साल से क्यों नहीं बदली गई लिमिट?
सेक्शन 80C की सीमा में आखिरी बड़ा बदलाव बजट 2014 में किया गया था, जब इसे 1 लाख से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये किया गया था। इसके बाद से अब तक
- महंगाई कई गुना बढ़ चुकी है,
- हेल्थ इंश्योरेंस प्रीमियम महंगे हो गए हैं,
- शिक्षा और रिटायरमेंट खर्च बढ़े हैं,
- लेकिन टैक्स बचाने की सीमा वहीं की वहीं अटकी रही।
यही वजह है कि टैक्सपेयर्स लंबे समय से सरकार से इसमें बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं।
क्या सरकार बढ़ा सकती है लिमिट 3 से 3.5 लाख तक?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कई उद्योग संगठनों और टैक्स विशेषज्ञों ने सरकार को औपचारिक सुझाव भेजे हैं। खास तौर पर AMCHAM (American Chambers of Commerce in India) ने सेक्शन 80C की लिमिट को बढ़ाकर 3.5 लाख रुपये करने की मांग की है।
- इससे मिडिल क्लास पर टैक्स बोझ कम होगा
- लोग ज्यादा सेविंग और इन्वेस्टमेंट करेंगे
- लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल सिक्योरिटी मजबूत होगी
- इकोनॉमी में भी पूंजी प्रवाह बढ़ेगा
- अगर लिमिट बढ़ती है तो टैक्सेबल इनकम सीधे कम होगी और हर महीने लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा बचेगा।
टैक्सपेयर्स को कितना फायदा हो सकता है?
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- 30% टैक्स स्लैब में आने वाले व्यक्ति को लगभग ₹45,000 तक की अतिरिक्त टैक्स बचत
- 20% स्लैब वालों को करीब ₹30,000 की राहत
- 10% स्लैब वालों को भी अच्छी खासी बचत
यानी यह बदलाव करोड़ों परिवारों की फाइनेंशियल प्लानिंग को आसान बना सकता है।
क्या सच में होगा बदलाव या फिर उम्मीद ही रह जाएगी?
हालांकि अभी तक सरकार की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। लेकिन जिस तरह से महंगाई और टैक्स बोझ को लेकर दबाव बढ़ रहा है, उसे देखते हुए बजट 2026 में सेक्शन 80C को लेकर बड़ा फैसला आ सकता है। अब सबकी नजरें 1 फरवरी 2026 के बजट भाषण पर टिकी हैं कि क्या मिडिल क्लास को यह लंबे समय से इंतजार कर रही राहत मिलेगी या नहीं।
