- अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं
मसूरी। उत्तराखंड के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल मसूरी से एक चिंताजनक और संवेदनशील घटना सामने आई है, जहां करीब एक सदी पुरानी सूफी कवि बाबा बुल्ले शाह की मजार में तोड़फोड़ की गई है। यह घटना शनिवार शाम बाला हिसार इलाके में हुई, जिसका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में कुछ लोग धार्मिक नारे लगाते हुए मजार को नुकसान पहुंचाते दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वायरल फुटेज की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन पुलिस ने मजार में तोड़फोड़ की घटना को स्वीकार करते हुए एफआईआर दर्ज कर ली है।
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स्थानीय लोगों के अनुसार, 25 से 30 लोगों की भीड़ हथौड़े और लोहे की रॉड लेकर मजार परिसर में घुसी और धार्मिक प्रतीकों को नुकसान पहुंचाया। आरोप है कि धार्मिक पुस्तकों का अपमान किया गया और दीवारों को तोड़ा गया। कुछ प्रत्यक्षदर्शियों ने इसे जानबूझकर सांप्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिश बताया है। बाबा बुल्ले शाह (1680–1757) पंजाबी भाषा के महान सूफी संत, कवि और विचारक थे। उनकी रचनाएं प्रेम, समानता और इंसानियत का संदेश देती हैं और धार्मिक कट्टरता के खिलाफ आवाज उठाती हैं। मसूरी में स्थित यह मजार लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रही है और इसे क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा माना जाता है। घटना को लेकर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। कांग्रेस प्रवक्ता सुप्रिया श्रीनेत ने इसे नफरत फैलाने वाली मानसिकता का उदाहरण बताते हुए कहा कि देश को विभाजन की ओर धकेलने वाली ऐसी घटनाएं बेहद खतरनाक हैं। वहीं एक दक्षिणपंथी संगठन से जुड़े नेता ने कथित तौर पर इस कार्रवाई की जिम्मेदारी लेते हुए इसे “अतिक्रमण हटाने” का प्रयास बताया है, जिससे विवाद और गहरा गया है।
पुलिस की कार्रवाई पर उठ रहे सवाल
मसूरी पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी है, लेकिन घटना के कई घंटे बीत जाने के बावजूद किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि भारतीय न्याय संहिता (BNS) की जिन धाराओं में मामला दर्ज हुआ है, उनमें तत्काल गिरफ्तारी अनिवार्य नहीं है। जांच शुरू कर दी गई है और दोषियों की पहचान के बाद कार्रवाई की जाएगी। एफआईआर में धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और पूजा स्थल को नुकसान पहुंचाने से जुड़ी धाराएं लगाई गई हैं, जिनमें दो से पांच साल तक की सजा का प्रावधान है। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि यह हमला पूरी तरह योजनाबद्ध था और इसका उद्देश्य धार्मिक भावनाओं को भड़काना था।
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मुस्लिम संगठनों में आक्रोश
घटना के बाद स्थानीय मुस्लिम संगठनों में भारी नाराजगी देखी जा रही है। मुस्लिम सेवा संघ के नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द गिरफ्तारियां नहीं हुईं तो वे विरोध प्रदर्शन करेंगे। उनका कहना है कि मसूरी जैसे शांत पहाड़ी शहर में इस तरह की घटनाएं सांप्रदायिक सौहार्द को गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं। फिलहाल पुलिस जांच जारी है, लेकिन कार्रवाई की धीमी रफ्तार पर सवाल उठ रहे हैं। यह घटना केवल एक धार्मिक स्थल पर हमला नहीं, बल्कि सामाजिक एकता पर चोट के रूप में देखी जा रही है।
