- इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र की टीम की मेहनत लाई रंग, एक वर्ष बाद मिली लोगों की गाढ़ी कमाई
- बीते साल 2024 में मटियारी चौराहे के पास इंडियन ओवरसीज बैंक में 14 लॉकर काटकर हुई घटना का मामला
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। यूं तो किसी न किसी समय खाकी वर्दी वालों पर अंगुलियां उठती रहती है, लेकिन इसी खाकी वर्दी के बीच ऐसे भी हैं जो मेहनत से पीछे नहीं रहते हैं। बीते साल 2024 में 22-23 दिसंबर की रात चिनहट क्षेत्र के मटियारी चौराहे से चंद कदमों की दूरी पर स्थित इंडियन ओवरसीज बैंक में घुसकर बदमाशों ने 42 लॉकर काटकर करोड़ों के गहने व नकदी लूट कर भाग निकले थे। इस मामले में डीसीपी पूर्वी शशांक के निर्देश पर पुलिस टीम ने मुठभेड़ के दौरान वारदात को अंजाम देने वाले को ढेर कर दिया था, जबकि दो को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजा था।
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घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस बैंक में गहने और नकदी जमा करने वाले लोगों के होश उड़ गए और आनन-फानन में मौके पर पहुंचे तो देखा कि उनकी गाढ़ी कमाई नदारद थी। पुलिस ने दो-चार दिन गुजरने के बाद कुछ लोगों के जेवरात बरामद कर उन्हें सौंपा, लेकिन वह संतुष्ट नहीं थे। इसके बाद इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्रा की देखरेख में एक बार फिर पुलिस ने अदालत में पैरवी शुरू की। पूर्व में गिरफ्तार हुए बदमाशों के कब्जे बरामद जेवरात व नकदी बरामद हुई थी। इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्रा की टीम ने मजबूत पैरवी करते हुए अदालत से अनुरोध किया था। अदालत से मंजूरी मिलने के बाद मंगलवार को सदर मालखाना लखनऊ में लॉकर में गहने जमा करने वाले स्वामियों को बुलाकर उनकी गायब हुई गाढ़ी कमाई यानी गहनों को उनके सिपुर्द किया। एक साल बाद गहने और जेवरात पाकर स्वामियों ने डीसीपी पूर्वी शशांक सिंह, एडीसीपी, एसीपी विभूतिखंड विनय द्विवेदी के अलावा इंस्पेक्टर चिनहट दिनेश चंद्र मिश्रा तथा उनकी टीम को दुआएं दी।
