- एक माह बाद पहले दी गई टेंडर की जांच, अभी तक नहीं हुई पूरी
- मोटे कमिशन की खातिर चहेती फर्म को भुगतान करने की तैयारी
लखनऊ। शासन का निर्देश कारागार मुख्यालय के आला अफसरों के लिए कोई मायने नहीं रखता है। शासन ने टेंडर में हुई अनियमिताओं की जांच का आदेश दिया वहीं एआईजी जेल प्रशासन ने चहेती फर्म का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया है। विवादों से घिरे टेंडर का वर्क ऑर्डर और आपूर्ति होने वाले माल के परीक्षण ने एआईजी जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला मुख्यालय के अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि टेंडरों की जब तक जांच पूरी होगी उससे पूर्व माल की आपूर्ति कर भुगतान कर दिया जाएगा। उधर एआईजी जेल प्रशासन ने पूरे मामले पर चुप्पी साध रखी है।
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मिली जानकारी के मुताबिक कारागार मुख्यालय ने प्रदेश की जेलों में मसालों की आपूर्ति के लिए टेंडर निकाला गया। वित्तीय वर्ष 2025=26 के लिए अप्रैल माह के बजाए एआईजी के प्रशासन ने करीब आठ माह बाद अक्टूबर माह में विभाग ने टेंडर निकाला गया। इसके लिए जेल मुख्यालय को 10 निविदाएं प्राप्त हुई। मुख्यालय प्रशासन के अधिकारियों ने सात निविदाओं को निरस्त करते हुए तीन निविदाओं को पास किया और इन तीन में से अपनी चहेती फर्म शक्ति इंटरप्राइजेज को मसालों की आपूर्ति का ठेका दे दिया गया। एआईजी प्रशासन की इस मनमानी की शिकायत एक विधायक के माध्यम से शासन की गई। शासन के संयुक्त सचिव ने बीती 16 दिसंबर 2025 की निविदाओं की जांच का आदेश दिया। सूत्र बताते है कि शासन के टेंडरों की जांच करने के निर्देश के एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अभी तक इसकी जांच पूरी नहीं हो पाई। इसी दौरान यह मामला फिर सुर्खियों में आ गया। एक बार फिर इस गोलमाल की जांच डीआईजी कानपुर परिक्षेत्र का सौंप कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया। सूत्रों का कहना है कि दो स्तर पर होने वाली जांच के निर्देश के भी बाद बेखौफ AIG प्रशासन ने चहेती फर्म को वर्क ऑर्डर देकर माल के परीक्षण का भी निर्देश भी दे दिया।
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सूत्रों की माने तो कई वस्तुओं (माल) की आपूर्ति भी कर दी गई है। फर्म को भुगतान करने की तैयारी अंतिम चरण में है। एक तरफ शासन और डीजी जेल के जांच आदेश और दूसरी ओर आपूर्ति के बाद भुगतान किए जाने का मामला विभागीय अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। इसको लेकर तमाम तरह के कयास लगाए जा रहे है। चर्चा है कि शासन के जांच के निर्देश के बाद AIG प्रशासन के माल की आपूर्ति और भुगतान की संभावनाओं ने जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। उधर इस संबंध में जब प्रमुख सचिव कारागार अनिल गर्ग और एआईजी जेल प्रशासन धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा।
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की पत्नी का मुख्यालय में हंगामा
कारागार मुख्यालय में तैनात वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी की पत्नी का जेल मुख्यालय में हंगामा अधिकारियों और कर्मियों में चर्चा का विषय बना हुआ है। यह अलग बात है कि मुख्यालय के उच्च अधिकारियों ने इस गंभीर मसले पर मौन धारण कर रखा है। मिली जानकारी के मुताबिक बीते बुधवार को प्रशासनिक अधिकारी के अवकाश में रहने के दौरान पत्नी ने जेल मुख्यालय में अधिकारी के कैंप कार्यालय और नज़ारत अनुभाग में पहुंचकर मातहत कर्मियों को जमकर फटकार लगाई। सूत्र बताते है कि पत्नी इस बात को पड़ताल करने मुख्यालय पहुंची थी कि उनके पति किस दूसरी महिला के साथ राजस्थान गए हुए हैं। पत्नी का आरोप था कि उनके अवकाश पर जाने के बाद ड्राइवर और रसोईयां दोनों ही अचानक गायब हो गए। उधर विभाग के आला अफसरों ने इस मामले में चुप्पी साध रखी है जबकि इस हंगामे की पुष्टि मुख्यालय के कर्मियों और कार्यालय में लगे सीसीटीवी से की जा सकती है।
