आज है माघ मास का पहला प्रदोष व्रत, जानें शिव पूजा की संपूर्ण विधि और जरूरी नियम

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राजेन्द्र गुप्ता

हिंदू धर्म में प्रदोष व्रत भगवान शिव की कृपा पाने का सबसे शुभ दिन माना जाता है। माघ महीने के कृष्ण पक्ष का पहला प्रदोष व्रत विशेष महत्व रखता है, क्योंकि यह नए साल की शुरुआत और मकर संक्रांति के ठीक बाद आता है।

प्रदोष व्रत तिथि और समय

वैदिक पंचांग के अनुसार, माघ महीने के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी को रात 8 बजकर 16 मिनट पर शुरू होगी। इस तिथि का समापन 16 जनवरी को रात 10 बजकर 21 मिनट पर होगा। ऐसे में पंचांग को देखते हुए माघ महीने का पहला प्रदोष व्रत दिन शुक्रवार 16 जनवरी को रखा जाएगा।

प्रदोष व्रत की पूजा विधि

  • सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें।
  • दिन भर सात्विक रहें और शिव मंत्रों का मन ही मन जाप करें।
  • शाम को सूर्यास्त से करीब 45 मिनट पहले दोबारा स्नान करें।
  • इसके बाद भगवान शिव का गंगाजल, दूध, दही, शहद और घी से अभिषेक करें।
  • उन्हें बिल्व पत्र, धतूरा, आक के फूल और भस्म अर्पित करें।
  • प्रदोष व्रत की कथा पढ़ें और अंत में आरती करें।
  • पूजा में हुई सभी गलती के लिए माफी मांगे।

भगवान शिव की विशेष कृपा

प्रदोष काल में शिव की आराधना करने से विशेष फल प्राप्त होता है। शास्त्रो में जिक्र है कि प्रदोष काल में भगवान शिव भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करते हैं।

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पापों का नाश और पुण्य की प्राप्ति

प्रदोष व्रत करने से जाने-अनजाने किए गए पापों का नाश होता है। जीवन में पुण्य और शांति की प्राप्ति होती है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार प्रदोष व्रत पूजा नियमानुसार करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

प्रदोष व्रत को कष्टों से मुक्ति दिलाने वाला भी माना जाता है

पुराणों के अनुसार, समुद्र मंथन के समय भगवान शिव ने विष का पान किया था। माना जाता है कि उन्होंने प्रदोष काल में ही विषपान किया था, इसीलिए इस समय शिव पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन व्रत करने से मनुष्य के जीवन से रोग, शोक तथा भय का सर्वनाश होता है। इस व्रत को आर्थिक संकट और परिवारिक कलह से मुक्ति दिलाने वाला भी माना गया है।

प्रदोष व्रत पूजा से धन, स्वास्थ्य और सफलता से जुड़ी इच्छाएं पूरी होती हैं

इस व्रत को मनोकामना पूर्ति का व्रत भी कहा जाता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक प्रदोष व्रत करने से विवाह और संतान से जुड़ी परेशानियां दूर होती है। प्रदोष व्रत पूजा से धन, स्वास्थ्य और सफलता से जुड़ी इच्छाएं पूरी होती हैं।

शिव–पार्वती की साथ में आराधना करना अधिक फलदायी होती है

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत में भगवान शिव के साथ माता पार्वती की पूजा करने का भी विधान है। जिससे दांपत्य जीवन में जीवनसाथी के साथ रिश्तों में गहराई आती है। परिवार में सुख, शांति और सौहार्द बना रहता है।

शुक्र प्रदोष व्रत का उपाय

  • शिवलिंग पर जलाभिषेक करें।
  • शिवलिंग पर 108 अक्षत अर्पित करें।
  • शिव-शक्ति पर इत्र अर्पित करें और सफेद मिठाई का भोग लगाएं।
  • प्रदोष काल में एक मुखी घी का दीपक जलाकर शिव स्तोत्र’ का पाठ करें।
  • शाम को किसी जरूरतमंद को चावल, दूध या दही का दान करना अत्यंत शुभ होता है।
  • शिवजी को चंदन, भस्म, बेलपत्र, धतूरा और मदार के फूल अर्पित करें।
  • शिवलिंग पर गंगाजल, दूध, दही, घी, शहद और शक्कर से अभिषेक करें।
  • “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।

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