Business : पिछला कारोबारी सप्ताह शेयर बाजार निवेशकों के लिए बेहद निराशाजनक साबित हुआ। वैश्विक संकेतों की कमजोरी, ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते बाजार में भारी दबाव देखने को मिला। इसका सीधा असर देश की सबसे मूल्यवान कंपनियों पर पड़ा, जहां टॉप-10 में शामिल 7 कंपनियों का संयुक्त मार्केट कैप करीब ₹3.63 लाख करोड़ घट गया।
इस दौरान बीएसई सेंसेक्स लगभग 2185 अंकों (2.54%) की गिरावट के साथ बंद हुआ, जिसने निवेशकों की संपत्ति को बड़ा झटका दिया। सबसे अधिक नुकसान रिलायंस इंडस्ट्रीज को उठाना पड़ा, जिसका बाजार पूंजीकरण सप्ताह के अंत तक ₹1.58 लाख करोड़ से अधिक घट गया। रिलायंस इंडस्ट्रीज का मार्केट कैप घटकर लगभग ₹19.96 लाख करोड़ पर आ गया। विश्लेषकों के मुताबिक, एनर्जी और टेलीकॉम सेक्टर में दबाव, साथ ही मुनाफावसूली के चलते रिलायंस के शेयरों पर नकारात्मक असर पड़ा। इसके अलावा बैंकिंग और आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनियों को भी नुकसान झेलना पड़ा।
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एचडीएफसी बैंक का मार्केट कैप करीब ₹96 हजार करोड़ घटकर ₹14.44 लाख करोड़ रह गया। भारती एयरटेल के बाजार मूल्य में लगभग ₹45 हजार करोड़ की गिरावट दर्ज की गई। वहीं बजाज फाइनेंस और लार्सन एंड टुब्रो जैसी कंपनियां भी बिकवाली की चपेट में रहीं। आईटी सेक्टर की दिग्गज कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) को भी निवेशकों की नाराजगी झेलनी पड़ी। इसका मार्केट कैप लगभग ₹15 हजार करोड़ घटा, जबकि इंफोसिस की वैल्यूएशन में करीब ₹10 हजार करोड़ की कमी आई। कमजोर वैश्विक आईटी डिमांड और अमेरिका-यूरोप के बाजारों से मिले संकेतों ने इस सेक्टर पर दबाव बनाया।
हालांकि, पूरी तस्वीर नकारात्मक नहीं रही। कुछ चुनिंदा कंपनियों ने इस गिरावट भरे बाजार में भी मजबूती दिखाई। आईसीआईसीआई बैंक निवेशकों की पसंद बना रहा और इसका मार्केट कैप लगभग ₹35 हजार करोड़ बढ़ गया। इसके अलावा हिंदुस्तान यूनिलीवर और भारतीय स्टेट बैंक के बाजार मूल्य में भी हल्की बढ़ोतरी दर्ज की गई। विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में यह गिरावट अस्थायी हो सकती है। मजबूत फंडामेंटल वाली कंपनियों में लंबी अवधि के निवेशकों के लिए यह अवसर भी साबित हो सकता है, हालांकि फिलहाल सतर्कता बरतना जरूरी है।
