सपा के बाद भाजपा सरकार में भी मलाई काट रहे बाबू

आईजी
  • जेल मुख्यालय में कई बाबुओं का नहीं होता पटल परिवर्तन
  • गोपनीय, विधि और कानपुर परिक्षेत्र के बाबू का करीब 20 साल से नहीं हुआ पटल परिवर्तन

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। सपा के बाद भाजपा सरकार में भी कई बाबू मलाई काट रहे हैं। कारागार मुख्यालय में तैनात कई बाबुओं का सालों से पटल परिवर्तन ही नहीं किया गया है। लंबे समय से एक ही पटल पर जमे यह बाबू अकूत संपत्ति का मालिक बन जाने के बाद भी गोपनीय, विधि प्रकोष्ठ, कानपुर परिक्षेत्र छोड़ने को तैयार नहीं है। मजे की बात यह है कि विभाग के आला अफसरों का तर्क है इन्हें हटाने से कार्य बाधित होगा, जबकि हकीकत यह है कि काम के जानकर बाबुओं को काम करने का मौका ही नहीं दिया जा रहा है। सिर्फ चुनिंदा बाबुओं से ही काम लिया जा रहा है। उधर मुख्यालय के आला अफसरों ने इस गंभीर मसले पर चुप्पी साध रखी है।

कारागार मुख्यालय से प्रदेश भर की जेलों का संचालन होता है। इस संचालन के लिए मुख्यालय में जेल अधिकारियों की प्रोन्नत प्रक्रिया, विभागीय कार्यवाही समेत अन्य महत्वपूर्ण कार्य गोपनीय अनुभाग से होते है। इस अनुभाग के प्रशासनिक अधिकारी ने करीब दो दशक से अधिक समय से इस पटल पर कब्जा जमा रखा है। सूत्रों का कहना है कि विभाग में कई डीजी, एआईजी प्रशासन और डीआईजी बदल गए लेकिन इस बाबू का गोपनीय अनुभाग से आज तक हटाया नहीं गया है ।इस बाबू का आज भी गोपनीय अनुभाग पर कब्जा बरकरार है। कुछ समय पूर्व इस बाबू को चंद दिनों के लिए निर्माण अनुभाग में भेजा जरूर गया लेकिन फिर गोपनीय में ही वापस कर दिया गया। मजे की बात यह है कि लंबे समय से गोपनीय अनुभाग देख रहे इस बाबू को गोपनीय के साथ इस बाबू को डीजी कैंप कार्यालय का भी प्रभार सौंप दिया गया।

इसी प्रकार न्यायालय से संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के विवादों की पैरवी के लिए मुख्यालय में विधि प्रकोष्ठ अनुभाग स्थापित है। इस अनुभाग में भी एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी ने बीते करीब 25 साल से कब्जा जमा रखा है। इस बाबू को प्रमोशन के बाद भी नहीं हटाया गया है। सूत्रों की माने तो इस अनुभाग में उन्हीं पीड़ितों की सुनवाई होती है जो बाबुओं को मोटा सुविधा शुल्क देते है। सुविधा शुल्क नहीं देने वालों को मुंह की खानी पड़ती है। हाल ही में हेड वार्डर से डिप्टी जेलर पद पर हुई प्रोन्नत प्रक्रिया इसका जीता जागता उदाहरण है। न्यायालय में विभाग की ओर से लचर पैरवी होने के कारण प्रोन्नति कर्मियों को पदावनत तक होने के लिए विवश होना पड़ा। यह तो एक बानगी है इसी प्रकार लचर पैरवी की वजह से विभाग को दर्जनों मामलों में विभाग को मुंह की खानी पड़ी है। इसके बाद भी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी बाबू आज भी वहीं पर बरकरार है। इसी प्रकार लंबे समय से एक बाबू (स्टेनो) ने कानपुर जेल परिक्षेत्र पर कब्जा जमा रखा है। सूत्रों का कहना है कि सपा सरकार में तैनात हुआ यह बाबू भाजपा सरकार में भी मलाई काट रहा है। मुख्यालय प्रशासन ने इस बाबू को अब कानपुर जेल परिक्षेत्र के साथ ही साथ डीआईजी कारागार मुख्यालय का भी अतिरिक्त प्रभार सौंपकर उसकी वसूली में इजाफा जरूर कर दिया है। सूत्र बताते है कि इस बाबू को परिक्षेत्र की जेलों से आने वाले लिफाफों की संपूर्ण जानकारी है। इसलिए इसको हटाया नहीं जाता है। इन बाबुओं के संपत्ति की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो दूध का दूध पानी सामने आ जाएगा। उधर इस संबंध में जब एआईजी (प्रशासन) धर्मेंद्र सिंह से बात करने का प्रयास किया गया तो हर बार की तरह इस बार भी उन्होंने फोन नहीं उठाया।

आगरा जेल परिक्षेत्र के बाबुओं ने भी मचा रखी लूट

कारागार मुख्यालय के बाबू तो बाबू जेल परिक्षेत्र के बाबुओं ने भी लूट मचा रखी है। यह बात पढ़ने में भले ही अटपटी लगे लेकिन आगरा जेल परिक्षेत्र इस सच की पुष्टि करता है। आगरा जेल परिक्षेत्र में करीब 18 साल से तैनात बाबू रंजना कमलेश और पवन शर्मा की अवैध वसूली से परिक्षेत्र की जेलों के जेलकर्मी काफी त्रस्त है। जेलकर्मियों का आरोप है कि इस कार्यालय में बगैर सुविधा शुल्क दिए कोई काम ही नहीं होता है। विभागीय कार्रवाई को खत्म कराने के लिए मोटी रकम वसूल की जा रही है। मुख्यालय में बाबुओं से सेटिंग गेटिंग रखने वाले यह बाबू स्थानांतरण सत्र के दौरान भी वार्डरो की मनमाफिक जेलों पर तैनाती कराने के लिए मोटी रकम वसूल करने से बाज नहीं आते है। मुख्यालय इन भ्रष्टाचारी बाबुओं को हटाने की हिम्मत ही नहीं जुटा पा रहा है।

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