भारत-खाड़ी क्षेत्र के बीच प्राचीन संबंधों को जीवंत करेगी ‘कौण्डिन्य’ की ओमान यात्रा

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शाश्वत तिवारी

नई दिल्ली। भारतीय नौसेना का इंजन रहित पारंपरिक समुद्री जहाज INSV कौण्डिन्य सोमवार को अपनी पहली अंतरराष्ट्रीय यात्रा पर पोरबंदर से ओमान के मस्कट के लिए रवाना हुआ। यह जहाज अरब सागर में उन प्राचीन समुद्री मार्गों से होकर जाएगा, जो कभी भारत के पश्चिमी तट को खाड़ी क्षेत्र से जोड़ते थे। इस कदम से भारत और खाड़ी क्षेत्र के बीच सैकड़ों वर्षों पुराने संबंध पुनर्जीवित हुए हैं। यह जहाज पारंपरिक सिलाई (स्टिच्ड) विधि का इस्तेमाल करके बनाया गया है, जिसका निर्माण पांचवीं शताब्दी के जहाजों की तर्ज पर किया गया है। प्राचीन अजंता गुफाओं के एक चित्र से प्रेरणा लेकर इसे बनाया गया है।

इस जहाज की खास बात यह है कि बिना इंजन होने साथ-साथ इसे रस्सियों, लकड़ी और रेजिन की मदद से बनाया गया है। कौण्डिन्य अरब सागर पार करते हुए लगभग 1,400 किलोमीटर की दूरी तय कर मस्कट पहुंचेगा और यह यात्रा प्राचीन समुद्री व्यापारिक मार्गों को फिर से जीवंत करेगी। मस्कट में कौण्डिन्य का आगमन सदियों से चली आ रही मैत्री, विश्वास और सम्मान के प्रतीक के रूप में देखा जाएगा। यह एक पारंपरिक स्टिच्ड शिप (सिलाई वाला जहाज) है, जिसकी लंबाई लगभग 19.6 मीटर, चौड़ाई 6.5 मीटर और ड्राफ्ट (पानी में गहराई) करीब 3.33 मीटर है। यह पूरी तरह से सिर्फ पाल (सेल) से चलता है। इसे सिलाई किया हुआ जहाज इसलिए कहा जाता है, क्योंकि इसकी लकड़ी की तख्तियां लोहे की कीलों से नहीं, बल्कि नारियल के रेशे से बनी रस्सियों द्वारा सिलाई (सुई-धागे की तरह) की जाती हैं।

 

इस जहाज का नाम नाविक कौंडिन्य के नाम पर रखा गया है, जिनके बारे में माना जाता है कि उन्होंने प्राचीन काल में भारत से दक्षिण पूर्व एशिया तक की यात्रा की थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ‘एक्स’ पोस्ट पर कहा यह देखकर बेहद खुशी हो रही है कि आइएनएसवी कौंडिन्य पोरबंदर से मस्कट, ओमान के लिए अपनी पहली यात्रा पर निकल रहा है। चालक दल को मेरी शुभकामनाएं, यह यात्रा सुरक्षित और यादगार हो, क्योंकि वे खाड़ी क्षेत्र और उससे आगे के साथ हमारे ऐतिहासिक संबंधों को पुन: स्थापित कर रहे हैं। पीएम मोदी ने कहा कि प्राचीन भारतीय सिलाई-जहाज तकनीक से निर्मित यह पोत भारत की समृद्ध समुद्री परंपराओं को दर्शाता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा यह जहाज इतिहास, कारीगरी और आधुनिक नौसैनिक विशेषज्ञता का एक दुर्लभ संगम है। यह उन ऐतिहासिक समुद्री रास्तों पर चलेगा, जो कभी भारत को खाड़ी क्षेत्र और उससे आगे जोड़ते थे।

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