गुरु गोबिंद सिंह की जयंती: साहस और समानता का प्रकाश पर्व

राजेन्द्र गुप्ता

गुरु गोबिंद सिंह की जयंती पौष माह की शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाई जाती है और इस बार ये तिथि साल में दो बार पड़ी है। एक बार 6 जनवरी को ये पर्व मनाया जा चुका है और अब 27 दिसंबर 2025 को ये त्योहार मनाया जाएगा। इस दिन देश भर के गुरुद्वारों में अखंड पाठ और कीर्तन का आयोजन किया जाता है। साथ ही नगर कीर्तन निकाले जाते हैं और लंगर का भी आयोजन होता है। इस दिन श्रद्धालु गुरु साहिब  द्वारा दी गई शिक्षाओं का स्मरण करते हैं।

गुरु गोबिंद सिंह जयंती

27 दिसंबर 2025 को गुरु गोबिन्द सिंह जी की 359वीं जन्म वर्षगांठ मनाई जाएगी। सप्तमी तिथि का प्रारम्भ 26 दिसम्बर 2025 की दोपहर 01:43 पी एम बजे से होगा और समापन 27 दिसम्बर 2025 की दोपहर 01:09 बजे होगा।

गुरु गोबिंद सिंह जी का ऐतिहासिक योगदान

  • गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 में बैसाखी के दिन खालसा पंथ की स्थापना की।
  • गुरु गोबिंद सिंह जी ने सभी को पांच ककार (केश, कंघा, कड़ा, कच्छा, कृपाण) का महत्व बताया।
  • गुरु साहिब जी ने मुगल अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई।
  • गुरु गोबिंद सिंह जी ने ही गुरु ग्रंथ साहिब को सिखों का शाश्वत गुरु घोषित किया।

गुरु गोबिंद सिंह जयंती कैसे मनाते हैं?

  • इस दिन गुरुद्वारों में अखंड पाठ साहिब का आयोजन किया जाता है।
  • कीर्तन के माध्यम से गुरु साहिब की शिक्षाओं का स्मरण होता है।
  • इस दिन कई स्थानों पर भव्य नगर कीर्तन निकाले जाते हैं।
  • इस दिन गुरु साहिब की शिक्षाओं का प्रचार किया जाता है।
  • सभी गुरुद्वारों में इस दिन लंगर का आयोजन जरूर किया जाता है।
  • इस दिन जरूरतमंदों को भोजन, कपड़े और दवाइयां बांटी जाती हैं।
  • घरों में गुरबाणी का पाठ होता है।

गुरु गोबिंद सिंह जयंती का धार्मिक और सामाजिक महत्व

गुरु गोबिंद सिंह जयंती केवल एक जन्मोत्सव नहीं है, बल्कि यह साहस, त्याग, समानता और सेवा के मूल्यों को आत्मसात करने का दिन है। इस दिन सिख समुदाय गुरु गोविंद सिंह जी की शिक्षाओं और मूल्यों को याद कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लेता है। यह पर्व हमें सिखाता है कि धर्म का अर्थ धार्मिक अनुष्ठानों का पालन नहीं, अपितु अन्याय के विरुद्ध खड़े होने का साहस भी है। गुरु गोबिंद सिंह जी का जीवन हमें यह संदेश देता है कि आध्यात्मिकता और वीरता एक साथ चल सकती हैं।

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