- लखनऊ में 50 विधायकों की हुई बैठक में ब्राह्मणों की सरकार से नाराजगी रही मुख्य मुद्दा
- इस बार सर कमर से दूर जा सकते हैं ब्राह्मण मतदाता, दबा सकते है ‘नोटा’
अजय पाठक
उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर जातीय समीकरणों की हलचल तेज हो गई है। ठाकुर भाजपा विधायकों के बाद अब ब्राह्मण विधायकों ने भी अपना अलग ‘कुटुम्ब’ तैयार कर लिया है। विधानमंडल के शीतकालीन सत्र के बीच मंगलवार शाम लखनऊ में कुशीनगर के भाजपा विधायक पीएन पाठक (पंचानंद पाठक) के आवास पर ब्राह्मण विधायकों की एक अहम बैठक हुई। इस बैठक को ‘सहभोज’ का नाम दिया गया, जिसमें पूर्वांचल और बुंदेलखंड के विधायकों की प्रमुख भागीदारी रही। बैठक में पत्रकार से विधायक बने डॉ. शलभ मणि त्रिपाठी, मिर्जापुर विधायक रत्नाकर मिश्रा, एमएलसी उमेश द्विवेदी समेत अंकुर राज तिवारी, राकेश गोस्वामी, कैलाश नाथ शुक्ला जैसे कई नेता मौजूद रहे। खास बात यह रही कि इसमें भाजपा के अलावा अन्य दलों के ब्राह्मण विधायक भी शामिल हुए। बताया जा रहा है कि करीब 45 से 50 विधायक इस बैठक में एक साथ बैठे।
सूत्रों के अनुसार, यूपी के ब्राह्मण समाज में पिछले कई महीनों से सरकार को लेकर असंतोष पनप रहा है, जो इटावा कथावाचक चोटी कांड के बाद और मुखर हो गया। ब्राह्मण बनाम यादव विवाद के दौरान किसी बड़े ब्राह्मण नेता का मौके पर न पहुंचना भी नाराजगी की वजह बना। सोशल मीडिया पर ‘ब्राह्मण एकता’ जैसे प्लेटफॉर्म से सरकार और ब्राह्मण विधायकों पर तीखे सवाल उठाए गए। परशुराम सेना संघ ने भी आरोप लगाया है कि सभी पार्टियां ब्राह्मणों को कमजोर करने में लगी हैं और 2027 में इसका जवाब दिया जाएगा। फिलहाल, इस कुटुम्ब और सहभोज को ब्राह्मण विधायकों की एकजुटता और अपनी राजनीतिक आवाज मजबूत करने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
