लखनऊ। अवधी घराने के वरिष्ठ और प्रख्यात पखावज वादक डॉ. राज खुशीराम का बुधवार देर रात निधन हो गया। उनके निधन से भारतीय शास्त्रीय संगीत, विशेषकर ध्रुपद और पखावज परंपरा को अपूरणीय क्षति हुई है। वे 76 वर्ष के थे और पिछले कुछ दिनों से सांस संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। डॉ. राज खुशीराम अयोध्या घराने के महान पखावज वादक स्वामी पागल दास के शिष्य थे। उन्होंने गुरु-शिष्य परंपरा को पूरी निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया और पखावज वादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। वे लखनऊ घराने के प्रसिद्ध कथक गुरु पंडित लच्छू महाराज की शिष्या एवं सुप्रसिद्ध कथक नृत्यांगना कपिला राज के पति भी थे।
उत्तर प्रदेश संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार से सम्मानित डॉ. खुशीराम को ध्रुपद गायन के साथ संगत और एकल पखावज प्रस्तुति के लिए विशेष रूप से जाना जाता था। ऑल इंडिया रेडियो के ग्रेड-ए कलाकार के रूप में उन्होंने देश-विदेश में भारतीय शास्त्रीय संगीत का मान बढ़ाया। लॉकडाउन के दौरान उन्होंने विश्व कल्याण की भावना से पखावज वादन कर कला को साधना का रूप दिया था। वरिष्ठ तबला वादक एवं संगीत नाटक अकादमी के प्रशिक्षक डॉ. पवन तिवारी ने बताया कि दो दिन पहले ही उनकी तबीयत खराब होने की जानकारी मिली थी। सांस लेने में दिक्कत के चलते उन्हें केजीएमयू में दिखाया गया, लेकिन राहत न मिलने पर बुधवार शाम उनका निधन हो गया।
डॉ. राज खुशीराम का अंतिम संस्कार गुरुवार सुबह 11 बजे बैकुंठ धाम, भैंसाकुंड में किया जाएगा। उनके निधन पर वरिष्ठ रंगकर्मी डॉ. अनिल रस्तोगी, कला समीक्षक राजवीर रतन, रंगकर्मी गोपाल सिन्हा सहित कई कला मनीषियों ने गहरा शोक व्यक्त किया है। संगीत जगत ने एक साधक, गुरु और सहज व्यक्तित्व को खो दिया है।
