बुन्देलखण्ड। झांसी जिले के बबीना थाना क्षेत्र के मुरारी गांव में एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। यहाँ एक पिता ने अपनी 22 वर्षीय बेटी नम्रता की सगाई वन विभाग के एक कर्मचारी से तय की थी, लेकिन सगाई के महज एक दिन बाद बेटी अपने प्रेमी के साथ फरार हो गई और प्रयागराज के एक मंदिर में हिंदू रीति-रिवाज से शादी रचा ली।
नम्रता पिछले छह साल से कानपुर की 37वीं बटालियन पीएसी में तैनात सिपाही गोलू भार्गव के साथ प्रेम संबंध में थी। दोनों एक-दूसरे से शादी करना चाहते थे, लेकिन परिवार इस रिश्ते के खिलाफ था। नम्रता ने एक साल तक घरवालों को मनाने की कोशिश की, पर जब बात नहीं बनी तो 3 दिसंबर को हुई सगाई के अगले दिन ही वह घर से निकल गई। गोलू के साथ मिलकर वह सीधे प्रयागराज पहुँची। वहाँ 5 दिसंबर को दोनों ने मंदिर में सात फेरे लिए और इसके बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपनी सुरक्षा के लिए याचिका भी दाखिल कर दी।
इधर, बेटी के गायब होने पर पिता ने छह दिसंबर को बबीना थाने में गोलू भार्गव के खिलाफ बेटी के अपहरण और हत्या की आशंका जताते हुए तहरीर दी। पुलिस ने जांच शुरू की तो सिपाही ने खुद थाना प्रभारी को फोन कर बताया कि नम्रता उसके साथ है और दोनों ने शादी कर ली है। बुधवार को पुलिस ने दोनों पक्षों को थाने बुलाया। करीब एक घंटे तक समझौते की कोशिश हुई, लेकिन नम्रता अपने फैसले पर अडिग रही। उसने साफ कह दिया कि वह अब केवल गोलू के साथ ही रहेगी। इसी बीच पिता की तबीयत अचानक बिगड़ गई और वह थाने में ही बेहोश होकर गिर पड़े। अफवाह उड़ी कि उन्होंने जहर खा लिया, लेकिन अस्पताल में जांच के बाद जहर की पुष्टि नहीं हुई। उन्हें पहले बबीना सीएचसी और फिर झांसी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया। फिलहाल दंपती हाईकोर्ट की सुरक्षा याचिका पर पुलिस संरक्षण में है। मामला प्रेम, परिवार और कानून की जटिल उलझन बन गया है।
