- सार्वजनिक हो चुकी है इस प्रतिष्ठित परिवार के बिघरने की कहानी
नया लुक ब्यूरो
बिहार विधानसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनता दल को मिली जोरदर शिकस्त के बाद लालू यादव के परिवार घमासान और टूटन शुरू हो चुकी है। लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य के राजनीति और परिवार से अलग होने की घोषणा के बाद लालू के परिवार के बिखरने की पूरी कहानी सार्वजनिक होती जा रही है। रोहणी तो सोशल मीडिया पोस्ट पर बहुत गंभीर आरोप लगाते हुए लिख चुकी हैं कि उन्हें “गंदी गालियाँ” दी गईं। इतना ही नहीं तेजस्वी यादव के दो करीबी सहयोगियों पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय यादव और लंबे समय के सहयोगी रमीज़ से जुड़े विवाद के दौरान किसी ने उन पर चप्पल से मारने की कोशिश भी की। रोहिणी ने अपनी भावुक पोस्ट में यह भी कहा कि परिवार के भीतर उन पर यह कहकर हमला किया गया कि उन्होंने अपने पिता लालू यादव को अपनी “गंदी किडनी” दान कर दी है।
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बता दें कि सिंगापुर में रहने वाली लालू यादव की बेटी रोहिणी आचार्य के परिवार से नाता तोड़ने के ऐलान के एक दिन बाद, उनकी चार और बहनों राजलक्ष्मी, रागिनी, हेमा, और चंदा अपने बच्चों के साथ चुपचाप पटना स्थित परिवार के 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास से दिल्ली के लिए रवाना हो गईं। यह कदम बिहार के सबसे प्रभावशाली राजनीतिक परिवारों में से एक में बढ़ती फूट का स्पष्ट संकेत है। राजलक्ष्मी, रागिनी, और चंदा यादव को अपने परिवारों के साथ दिल्ली के लिए निकलते देखा गया। उनके साथ हेमा यादव भी दिल्ली के लिए रवाना हुईं। सूत्रों के मुताबिक, ये सभी पिछले दो दिनों की घटनाओं से काफी परेशान थीं, जिसके कारण उन्होंने यह कदम उठाया।
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उन सभी का पटना से जाना RJD के लिए बेहद राजनीतिक और व्यक्तिगत उथल-पुथल के साथ हुआ है। पार्टी अभी भी बिहार विधानसभा चुनावों में अपनी सीटों की संख्या में भारी गिरावट से जूझ रही है। पिछली बार 75 सीटें आई थीं और इस बार सुई 25 पर आकर रुक गई। आरजेडी की यह बड़ी हार मानी जा रही है।
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पूरा विवाद लालू प्रसाद की बेटी रोहिणी आचार्य के बयान से सामने आया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से राजनीति और परिवार से अलग होने की घोषणा की। इस विवाद में, रोहिणी के बड़े भाई तेज प्रताप यादव, के नाटकीय बयानों ने आग में घी डालने वाला काम किया है। तेज प्रताप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा है कि इस “अन्याय” के परिणाम गंभीर होंगे। उन्होंने सीधे लालू यादव से कहा कि “पिताजी, मुझे बस एक इशारा, बस एक सहमति दीजिए, और बिहार की जनता इन जयचंदों को दफ़न कर देगी। वहीं आरजेडी सूत्रों के मुताबिक, यह विवाद 15 नवंबर को तेजस्वी और रोहिणी के बीच तीखी बहस के बाद और बढ़ गया, जिसमें रोहिणी ने पार्टी की चुनावी हार के लिए तेजस्वी के करीबी सलाहकार संजय यादव और उनकी टीम को जिम्मेदार ठहराया।
