नया लुक ब्यूरो
लखनऊ। ‘रोशनी गर खुदा को हो मंजूर , तो आंधियों में भी चिराग जलते हैं।‘… सालों पहले लिखी गयी मुश्ताक अश्क की ये लाइनें लखनऊ की रहने वाली काजल गुप्ता पर बिल्कुल खरी उतरती हैं। वाकई सैल्यूट करना पड़ेगा काजल के बुलन्द हौंसले को। दस साल पहले शादी हुयी और फिर दो नन्हें-मुन्ने बच्चों की मां बन गयी। परिवार-पति और दो बच्चों की परवरिश के बीच संतुलन साधते हुए करियर बनाना आसान काम नहीं था पर कुछ कर गुजरने का जज्बा ही था कि चार बार नाकाम होने के बाद काजल ने ICAI (इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया) Exam के लक्ष्य को 5वीं कोशिश में भेद ही दिया और Charter Accounted बनने में कामयाबी हासिल कर ली।
ये कहानी है हरियाणा यमुनानगर में रहने वाली काजल की, जहां अब उनका मायका है। उनके पिता पवन कुमार गोयल आर्मी में थे ऐसे में जहां-जहां पापा की पोस्टिंग होती फैमिली वहीं शिफ्ट हो जाती थी। इसलिए उनकी पढ़ाई कई शहरों में पूरी हुयी। यमुनानगर के कुरुक्षेत्र यूनिवर्सिटी से बीकॉम किया और फिर MBA करने दिल्ली आ गई। CA बनने का सपना उसने बचपन से ही पाल रखा था, वो सोचती थी, जब कभी मौका मिलेगा तो CA का Exam जरुर दूंगी। तीस साल की उम्र में शादी हुयी तो उन्हें लगा कि शायद अब यह सपना कभी पूरा न हो सकेगा। इससी दौरान दो बच्चे भी इसी दौरान हुए तो पढ़ाई में ब्रेक भी लगा पर काजल के बुलन्द हौंसले के आगे सारी परिस्थितियां बौनी हो गए। कामयाब होने का जज्बा हमेशा से रहा और इसी हौंसले के चलते वे 36 साल की उम्र में काजल CA बनने में कामयाब हो गयी।
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वैसे काजल की इस सफलता के पीछे उसके पति और परिवार का बहुत बड़ा योगदान भी रहा। एक मीडिया संस्थान से बातचीत के दौरान उनको कहा था कि शादी के बाद जब मेरी ऐज 30 साल की थी, मैंने CA की तैयारी शुरू की। पति ने तैयारी के दौरान पूरा सपोर्ट करने का भरोसा दिया, तभी हिम्मत जुटा पाई। छह साल की तैयारियों के बीच परिवार को भी संभालना होता। मेरा करियर बनाने के लिए उन्होंने ‘खुद वर्क फ्रॉम होम’ ले लिया। दो छोटे-छोटे बच्चों को संभालना बड़ा टास्क था। इसे उन्होंने बखूबी निभाया है। बिना उनके सपोर्ट के CA क्वालीफाई करना तो दूर प्रिपरेशन की भी न कर पाती। पति सीर से उनकी मुलाकात साल 2009 में दिल्ली में MBA की पढ़ाई के दौरान हुई थी। पति कानपुर से हैं। और उन्हें MBA पूरा करते ही वर्ष 2011 में एक कॉर्पोरेट कंपनी में नौकरी भी मिल गयी। करियर अच्छा चल रहा था, ग्रोथ भी सही मिल रही थी पर पति ने उन्हें सपोर्ट देने के लिए ऑफिस से वर्क फ्रॉम होम ले लिया था।
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काजल बताती है कि वे रात भर जाग कर पढ़ाई करती थी। इस दौरान कई बार जब बच्चा रोने लगता तो पति समीर ही उसे संभालते थे। सुबह बेटी को स्कूल भेजकर सो जाती थी ऐसे में छोटे बच्चे की ज्यादातर देखभाल पति समीर ही करते थे। आखिरकार सितंबर 2025 को 5वीं बार पेपर दिया। नवंबर में रिजल्ट आया तो CA बनने में कामयाब हो गई। ज्यादातर पढ़ाई ऑनलाइन ही की और फोकस सेल्फ स्टडी पर ही रहा।
