गन्ना बकाया बिल भुगतान में सरकार को गुमराह कर रहे अफसर!

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  • अधिकारी मस्त, एसीएस गन्ना व्यस्त और किसान त्रस्त
  • प्रदेश की 30 चीनी मिलों पर 2200 करोड़ से अधिक धनराशि बकाया
  • बकाया बिल भुगतान को लेकर सरकार के दावे हवा हवाई

नया लुक संवाददाता

लखनऊ। गन्ना किसानों के बकाया बिल भुगतान को लेकर प्रदेश सरकार के दावे भले ही कुछ हो लेकिन हकीकत ठीक इसके विपरीत ही है। वर्तमान समय में प्रदेश की 30 से अधिक चीनी मिलो पर करीब 2200 करोड़ रुपए का बकाया है। विभागीय मंत्री और गन्ना विकास विभाग के अधिकारी आधे अधूरे और भ्रामक आंकड़े प्रस्तुत कर गुमराह किया जा रहा है। नया पेराई सत्र शुरू होने में अब चंद दिनों का समय शेष बचा है ऐसे में पेराई सत्र से पहले किसानों के बकाया बिल का भुगतान हो पाना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन नजर आ रहा है। उधर गन्ना विकास विभाग के अधिकारी इस मसले पर कुछ भी बोलने से बचते नजर आए।

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विभागीय सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक पेराई सत्र 2024-25 के दौरान गन्ना किसानों का कुल देय मूल्य भुगतान 34,948 करोड़ रुपए था। जिसमें से अब तक केवल 32,738 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ है। वहीं, पेराई सत्र 2023-24 का लगभग 29 करोड़ रुपये का भुगतान अब तक दो चीनी मिलों पर बकाया है। सीएम योगी को गन्ना मंत्री और अधिकारी भुगतान के अधूरे और भ्रामक आंकड़े देकर स्थिति को लगातार बेहतर बताने की कोशिश कर रहे हैं। जबकि हकीकत यह है कि प्रदेश की 30 से अधिक चीनी मिलों पर करीब 2,200 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान अभी तक बकाया चल रहा  है। गन्ना विकास विभाग बकायेदार मिलों के वास्तविक आंकड़ों को छिपाकर बड़े औद्योगिक समूहों को सुरक्षा प्रदान कर रहा है, जिससे सरकार की साख पर सवाल उठने लगे हैं।

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मिली जानकारी के अनुसार सबसे बड़े बकायेदार औद्योगिक समूह में बजाज ग्रुप की 14 मिलों पर लगभग 1,265 करोड़ रुपये से अधिक बकाया चल रहा है। इसी प्रकार सिंभावली ग्रुप की 3 मिलों पर लगभग 300 करोड़ रुपये बकाया। मोदी ग्रुप की 2 मिलों पर लगभग 280 करोड़ रुपये बकाया। राणा ग्रुप की 4 मिलों पर करीब 90 करोड़ रुपये बकाया हैं। सूत्रों का कहना है कि इन बकाया आंकड़ों के बाद भी सरकार लगातार दावा कर रही है कि किसानों के गन्ना बकाया बिलों का शत प्रतिशत भुगतान कर दिया गया है। इस संबंध में जब अपर मुख्य सचिव चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास वीना कुमारी मीणा से बात करने का प्रयास किया गया तो कई प्रयासों के बाद भी उनका फोन नहीं उठा। गन्ना आयुक्त ने तो इस गंभीर मामले को यह कहकर टाल दिया कि आंकड़ों की अभी उन्हें कोई जानकारी नहीं है पता करने के बाद ही वह इस बारे में कुछ बता पाएंगी।

नए पेराई सत्र से पहले बकाया भुगतान हो पाना नामुमकिन!

उत्तर प्रदेश की कुल 121 चीनी मिलों में से 30 चीनी मिलों पर करोड़ों के गन्ना मूल्य भुगतान बकाया है। सबसे बड़े बकायेदारों में बजाज की 14 मिलें जिन पर गन्ना किसानो का कुल 1200 करोड़ रुपए से अधिक का गन्ना मूल्य बकाया है। बरेली जिले की नवाब गंज चीनी मिल में तो अब तक किसानों को बकाया गन्ना मूल्य का कोई भुगतान किया ही नहीं गया है। दीपावली के बाद नया पेराई सत्र 2025-26 शुरू होने से पहले बकाया गन्ना मूल्य भुगतान किसानो को मिलना मुश्किल ही नहीं नामुमकिन नजर आ रहा है। गन्ना विकास विभाग के अधिकारी झूठे आंकड़ों से गुमराह कर रहे हैं।

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