मुरादाबाद में पुलिस ने मुस्लिम बैंड बाजे वालों को हिन्दू नाम हटाने का दिया आदेश

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लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में पुलिस ने मुस्लिम बैंड संचालकों को अपने बैंड के नामों से हिंदू देवी-देवताओं के नाम हटाने का आदेश जारी किया है। यह निर्देश मुख्यमंत्री पोर्टल पर प्राप्त एक शिकायत के बाद आया, जिसमें दावा किया गया था कि कुछ मुस्लिम संचालक अपने बैंड के लिए हिंदू धार्मिक नामों का उपयोग कर रहे हैं, जो धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचा सकता है। मिली जानकारी के अनुसार के SP सिटी, कुमार रणविजय सिंह ने इस मामले में CM पोर्टल पर शिकायत सामने आने के बाद कार्रवाई करते हुए सभी संबंधित बैंड संचालकों को बुलाया और उन्हें अपने बैंड के नाम बदलने का निर्देश दिया। एसपी सिटी ने कहा कि मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत के आधार पर हमने बैंड संचालकों को बुलाकर निर्देश दिए हैं कि सभी ने इसका पालन करने का आश्वासन दिया है। सीएम पोर्टल पर शिकायत की गई थी कि मुरादाबाद में कई बैंड हिंदू देवी-देवताओं जैसे ‘मां दुर्गा’, ‘शिव’, या अन्य धार्मिक नामों के साथ संचालित हो रहे थे। पुलिस ने इन बैंड संचालकों को नए नाम चुनने के लिए समय दिया है और इसका अनुपालन करने के लिए निगरानी की जा रही है।

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मुरादाबाद के शैबी शर्मा नामक वकील ने इस मुद्दे को लेकर मुख्यमंत्री पोर्टल पर शिकायत दर्ज की। उनका तर्क था कि हिंदू धार्मिक नामों का इस्तेमाल मुस्लिम बैंड संचालकों द्वारा करना धार्मिक संवेदनशीलता के खिलाफ है। इस शिकायत के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की तो मामला सामने आ गया। हालांकि मुरादाबाद पुलिस हर छोटी-छोटी और मामूली घटनाओं की सूचना अपने एक्स हैंडल पर डालती है। जिसमें आधा ग्राम चरस बरामदगी तक की जानकारी शामिल है। लेकिन बैंडबाजे वालों के साथ बैठक की सूचना मुरादाबाद पुलिस ने अपने एक्स हैंडल पर नहीं डाली है। खबरों में कहा गया कि SP सिटी कुमार रणविजय सिंह ने मंगलवार को अधिकांश मुस्लिम बैंड मालिकों को तलब किया। एसपी सिटी ने बयान में कहा कि मुस्लिम बैंड संचालकों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हिन्दू नामों या देवी-देवताओं के नामों का इस्तेमाल न करें। बैंड संचालकों ने इस फैसले से सहमति भी जताई कि वे नए नाम रखेंगे।

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हालांकि उन्होंने इसके लिए कुछ समय मांगा है। शिकायतकर्ता शैबी शर्मा का कहना है कि मुरादाबाद में करीब 500 बैंड बाजे वाले हैं। लेकिन बहुत सारे मुस्लिम हैं। शैबी शर्मा ने दावा किया कि इस संबंध में यूपी के सीएम योगी आदित्यानाथ ने इसका संज्ञान लिया है और कार्रवाई का आदेश दिया है। यह कानूनी रूप से वैध है। हिन्दू पहचान की आड़ में इस तरह का कारोबार नहीं किया जा सकता। इस आदेश पर मुरादाबाद में मिलीजुली प्रतिक्रियाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे धार्मिक भावनाओं के सम्मान के रूप में देख रहे हैं, जबकि अन्य इसे सामुदायिक सद्भाव के लिए अनावश्यक कदम मानते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस मुद्दे को लेकर बहस छिड़ी हुई है, जहां कुछ यूजर्स ने इसे धार्मिक आधार पर भेदभाव का मामला बताया है, तो कुछ ने पुलिस के इस कदम का समर्थन किया है।

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यूपी में सामाजिक सौहार्द दांव पर

यह घटना उत्तर प्रदेश में हाल के उन मामलों में शामिल हो गई है, जहां धार्मिक संवेदनशीलता को लेकर प्रशासन ने कदम उठाए हैं। इससे पहले, मुजफ्फरनगर में कांवड़ यात्रा के दौरान ढाबों और दुकानों के नाम बदलने के आदेश दिए गए थे। मुरादाबाद का यह मामला भी इसी तरह की बहस को जन्म दे रहा है। कांवड़ यात्रा के दौरान ढाबों को दिए गए आदेश भी पुलिस के जरिए सामने आए थे। इस पर देशभर में आपत्ति जताई गई और  सुप्रीम कोर्ट ने इस तरह की गतिविधियों को रोकने के लिए यूपी सरकार को आज तक कोई स्पष्ट आदेश नहीं दिया। विश्लेषकों का मानना है कि इस तरह के कदम सामाजिक सौहार्द को प्रभावित कर सकते हैं, जबकि अन्य का कहना है कि यह धार्मिक संवेदनाओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया कदम है। मुरादाबाद पुलिस ने स्पष्ट किया है कि यह आदेश केवल शिकायत के आधार पर लागू किया गया है और इसका उद्देश्य सामाजिक तनाव को रोकना है। मुरादाबाद में बैंड संचालकों ने पुलिस के आदेश का पालन करने की सहमति दी है, लेकिन इस मामले का दीर्घकालिक प्रभाव अभी देखा जाना बाकी है। क्या यह कदम सामुदायिक एकता को मजबूत करेगा या समाज में नई दरारें पैदा करेगा। पुलिस ने कहा है कि वह इस मामले में किसी भी तरह के उल्लंघन पर सख्त कार्रवाई करेगी।

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मुस्लिम बैंड वालों को निर्देश के दूरगामी नतीजे

बैंड बाजे वाले जो शादियों और अन्य समारोहों में सेवाएं देते हैं, उनमें से उनकी मुस्लिम पहचान सामने आने पर आर्थिक नुकसान झेल सकते हैं। नाम बदलने से उनके कारोबार की पहचान भी प्रभावित हो सकती है। जिससे ग्राहकों का विश्वास कम हो सकता है। मुरादाबाद जो कई दंगे देख चुका है, वहां के स्थानीय लोगों का मानना है कि इस तरह के कदम अल्पसंख्यक समुदाय को अलग-थलग करने का कारण बन सकते हैं, जिससे सामाजिक एकता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। एक मुस्लिम बैंड वाले ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि उसके गुरु हिन्दू थे, उन्होंने मुझे अपना बैंड बाजा कारोबार शुरू करने के लिए शिव जी के नाम पर रखने को कहा। मैंने गुरु के आदेश का पालन किया। मेरा कारोबार बहुत अच्छा चल रहा है। इस मार्केट में मेरा नाम है। लेकिन अब मुझसे नाम बदलने को कहा गया है। यह नाइंसाफी है। लेकिन पुलिस का आदेश मानना पड़ेगा, वरना हमें मारा-पीटा जाएगा। कोई ताज्जुब नहीं कि मेरी बैंड बाजे की दुकान पर बुलडोजर चला दिया जाए।

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