- आर्थिक, स्वास्थ्य और सामाजिक असुरक्षा का मुद्दा भी उठाया
- कहा,जनता और सरकार के बीच सेतु का काम करता है पत्रकार
अनिल उपाध्याय
लखनऊ। आमतौर पर राजनेताओं को लेकर आम आदमी के जेहन में एक अलग ही तस्वीर बनी हुयी है। मसलन लंबा-चौड़ा लाव-लश्कर, अति व्यस्त जीवन शैली और साधारण लोगों से मिलने से बचने वाले रसूखदार व्यक्ति। दरअसल बहुतायत लोगों ने राजनेता को लेकर एक अलग तरीके का अक्स गढ़ लिया है पर आज भी तमाम राजनेता ऐसे है जिनकी नजर में राजनीति ‘ जनता का, जनता के लिए,जनता द्वारा’ किया जाने वाला काम है। ऐसे ही एक विधायक हैं राजधानी लखनऊ की सरोजनी नगर विधानसभा के डॉ. राजेश्वर सिंह।
दरअसल सरोजनी नगर के विधायक का काम करने का अंदाज और उनकी सोच उन्हें इन सबसे अलग रखती है। क्षेत्र के लोगों के लिए वे उपलब्ध न रहने वाले एक राजनेता नहीं बल्कि कहीं एक बड़े भाई के रुप में तो कहीं बेटे के रुप में नजर आते हैं। कुछ लोग इस बात को अतियुक्ति कह सकते हैं पर ऐसा सोचना गलत है। कुछ दिन पहले ही सरोजिनी नगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर उत्तर प्रदेश राज्य पत्रकार कल्याण कोष और राज्य पत्रकार कौशल विकास केंद्र की स्थापना करने का अनुरोध किया है। ये पत्र उन्होंने पत्रकारों की आर्थिक, स्वास्थ्य और सामाजिक असुरक्षा की स्थिति को देखते हुए लिखा है। दरअसल बात सिर्फ पत्रकारों की नहीं है। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि उनकी सोच ही ऐसी है। अभी पिछले दिनों उन्होंने क्षेत्र के मुसलमान परिवार को इलाज के लिए मुख्यमंत्री कोष से 5 लाख की मदद दिलवाई थी। क्षेत्र में ऐसे उदाहरण एक बल्कि तमाम उदाहरण हैं। समाज के हर वर्ग के लिए वे और उनकी टीम हमेशा उपलब्ध रहती है।
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सरोजिनी नगर के विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने मुख्यमंत्री को लिए अपने पत्र में कहा है कि पत्रकार समाज वह वर्ग है जो शासन और जनता के बीच सेतु का काम करता है। वह तमाम सरकारी योजनाओं, सामाजिक मुद्दों और जन अपेक्षाओं की आवाज़ को शासन तक पहुँचाने की जिम्मेदारी बखूबी निभाता है। उन्होंने पत्रकारों की कठिनाइयों को समझते हुए लिखा कि अनेक पत्रकार आर्थिक, स्वास्थ्य और सामाजिक असुरक्षा की स्थिति में जीवनयापन करते हैं। कई बार दुर्घटनाओं या गंभीर बीमारियों की स्थिति में उन्हें संस्थागत सहायता नहीं मिल पाती, जिससे उनकी पारिवारिक स्थिति प्रभावित होती है।
डॉ. सिंह ने मुख्यमंत्री से आग्रह किया है कि राज्य सरकार के सहयोग से 100 करोड़ रुपये के प्रारंभिक बजट के साथ पत्रकार कल्याण कोष की स्थापना की जाए ताकि इसके जरिए पत्रकारों और उनके परिवारों को आकस्मिक मृत्यु, गंभीर बीमारी या विकलांगता की स्थिति में आर्थिक सहायता मिल सके।
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विधायक ने अपने पत्र में वरिष्ठ अथवा दिव्यांग पत्रकारों को मासिक मानवीय भत्ता, पत्रकारों के बच्चों की उच्च शिक्षा हेतु छात्रवृत्ति और आपातकालीन राहत सहायता देने की भी बात कही है। विधायक डॉ. राजेश्वर सिंह ने यह भी सुझाव दिया कि उत्तर प्रदेश में राज्य पत्रकार कौशल विकास केंद्र खोला जाए, जहां पत्रकारों को डिजिटल मीडिया, डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सुरक्षा, सोशल मीडिया प्रबंधन और फैक्ट-चेकिंग जैसे आधुनिक विषयों का प्रशिक्षण दिया जा सके। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में पत्रकारिता का स्वरूप तेजी से बदल रहा है और ऐसे में पत्रकारों के लिए नई तकनीकी दक्षता हासिल करना समय की मांग है। उन्होंने प्रस्ताव भी रखा कि इस केंद्र में विश्वविद्यालयों और मीडिया संस्थानों के सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम संचालित किए जाएं ताकि पत्रकारिता के पेशे में कार्यरत लोगों को बदलते समय के अनुसार कौशल और सुरक्षा प्राप्त हो सके।
