दो टूक : GST की बैठक में राहत तो मिली लेकिन बैठक का समझिये भी संदेश

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राजेश श्रीवास्तव

GST के दो स्लैब के ऐलान के बाद काफी दिनों बाद सरकार की ओर से आम आदमी को राहत की कोई खबर मिली है। 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत ये दोनों स्लैब ऐसे हैं कि देखने में तो आसान लग रहे हैं। लेकिन 5 प्रतिशत में जो चीजें लायी गयी हैं उससे सरकार को केवल 3 फीसद का ही लाभ होता है जबकि 18 फीसद में जो सरकार को कर मिलता है वह 97 फीसद के आसपास है। अब आते हैं कि सरकार जीएसटी के राहत के ऐलान के बाद यह कहती नजर आयी कि GST काउंसिल ने यह ऐलान बैठक के बाद किया। इसमें सभी राज्यों के लोग शामिल हुए और तब यह निर्णय लिया गया। लेकिन दिलचस्प यह है कि अगर इसका ऐलान GST की बैठक के बाद हुआ तो फिर प्रधानमंत्री ने लालकिले की प्राचीर से ही 15 अगस्त को ऐलान पहले ही कैसे कर दिया था। क्या प्रधानमंत्री को पता था कि विपक्षी दलों की सरकारों के लोग भी इसे स्वीकार कर लेंगे। या फिर प्रधानमंत्री को भरोसा है कि सरकार जो भी चाहेगी वह मनवा ही लेगी। या फिर इस सरकार में जीएसटी काउंसिल हो या फिर कोई और बॉडी । इन सब का कोई मतलब नहीं है सब कुछ प्रधानमंत्री मोदी ही तय करते हैं।

गौरतलब है कि जीएसटी काउंसिल में देश के सभी राज्यों की भागीदारी है। इसमें कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, आम आदमी पार्टी शासित राज्य भी हैं। लेकिन जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में सभी राज्यों की सहमति से जीएसटी दरों में भारी कटौती हुई। आखिर उन्होंने विपक्षी दलों को कैसे मनाया? आप जान ही रहे होंगे कि वस्तु एवं सेवा कर प्रणाली या गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) में बड़ा सुधार हुआ है। इसे जीएसटी 2.० के नाम से पुकार जा रहा है। इसमें लग्जरी कार से लेकर एयर कंडीशनर और सेविग क्रीम से लेकर आइसक्रीम तक के टैक्स घट गए। यह बदलाव इसी महीने 22 तारीख से लागू हो रहा है। आपको पता है कि ऐसा करने में केंद्रीय वित्त मंत्री कैसे सफल रहीं? वह जीएसटी काउंसिल की बैठक में विपक्षी पार्टियों द्बारा शासित राज्यों, खास कर पश्चिम बंगाल, केरल, पंजाब और कर्नाटक के वित्त मंत्रियों को कैसे सहमत किया?

जानकारों की मानें तो GST में बड़े सुधार के लिए बीते तीन और चार सितंबर को दिल्ली के विज्ञान भवन में जीएसटी काउंसिल की बैठक बुलाई गई थी। यह बैठक थी तो दो दिनों की, लेकिन एक दिन में ही बात बन गई। तभी तो तीन तारीख को ही रात में 1० बजे सीतारमण ने प्रेस कांफ्रेंस कर बैठक में हुए फैसले की जानकारी सार्वजनिक कर दी। पहले समझा जा रहा था कि ममता बनर्जी के बंगाल, लेफ्ट के केरल, आम आदमी पार्टी के पंजाब और कांग्रेस शासित राज्य कर्नाटक के वित्त मंत्रियों को मनाना आसान नहीं होगा। लेकिन जब निर्मला सीतारमण तीन सितंबर की रात प्रेस कांफ्रेंस कर रही थीं, तब एक सवाल इस बारे में भी आया। उस समय उन्होंने बताया था कि यह काम जितना मुश्किल लग रहा था, उतना था नहीं। तभी तो दो दिन की मीटिग में जो होना था, वह एक ही दिन में हो गया। उल्लेखनीय है कि जीएसटी की दरों में बदलाव के आइडिया पहले से ही तैयार थे। काउंसिल को पता था कि कौन सी चीजें काम कर रही हैं और कौन सी नहीं। निर्मला सीतारमण और उनकी टीम ने पिछले छह महीनों में इसके लिए कई मीटिग की थीं। उन्होंने इस पर काफी होमवर्क किया था।

सूत्रों से पता चला है कि विपक्षी दलों के शासन वाले राज्यों को शुरू में राजस्व में कमी होने का डर था। कुछ राज्यों ने जीएसटी काउंसिल की मीटिग में इसका विरोध भी किया था, खासकर बंगाल ने। तब निर्मला सीतारमण ने राज्यों को भरोसा दिलाया कि जीएसटी कलेक्शन में केंद्र और राज्य दोनों का हिस्सा होता है। अगर राज्यों को नुकसान होगा, तो केंद्र को भी होगा। सरकार का मकसद आम आदमी को राहत देना है। इसलिए, केंद्र और राज्यों को मिलकर ये काम पूरा करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि राज्यों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, पंजाब और पश्चिम बंगाल तो मैराथन मीटिग में के शुरुआत में ही मान गए थे। बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो इसका क्रेडिट भी ले लिया।

उन्होंने कहा कि कुछ बदलाव तो वही हैं जो उन्होंने आठ साल पहले मांगे थे। लेकिन, कर्नाटक और केरल आखिर तक अड़े रहे। वे चाहते थे कि राज्यों को राजस्व में होने वाले नुकसान की भरपाई का ठोस आश्वासन दिया जाए। वे यह भी चाहते थे कि इस मुद्दे पर अगली मीटिग में बात हो। लेकिन, बाकी राज्य इस डेडलॉक से बोर हो गए थे। तब छत्तीसगढ़ के वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी ने कहा कि अगर कर्नाटक और केरल तैयार नहीं हैं, तो वोटिग करा लेनी चाहिए। GST काउंसिल में फैसले लेने के लिए वोटिग की व्यवस्था है। लेकिन आमतौर पर फैसले आम सहमति से ही लिए जाते हैं। अभी तक वोटिग का मौका सिर्फ एक बार ही आया, जबकि लॉटरी पर 28% GST का प्रस्ताव आया था। खैर, जब GST काउंसिल की 56वीं बैठक के दौरान छत्तीसगढ़ के ओ.पी. चौधरी बार-बार वोटिग की बात करने लगे, तो निर्मला सीतारमण मान गईं। तब बंगाल ने बीच में आकर कर्नाटक और केरल को मनाया। इसके बाद जो हुआ, वह तो आप जानते ही हैं।

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