- हादसे के बाद पुलिस-प्रशासन की टूटती है नींद
- पटाखा फैक्ट्री में विस्फोट का मामला
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। गुडंबा क्षेत्र के बेहटा कस्बे में रविवार सुबह से लेकर ग्यारह बजे तक सब-कुछ ठीक था। वहां सुबह से चहल-पहल थी और लोगबाग घर निकलकर बाजार का रूख कर चुके थे। बड़े चाय की चुस्की ले रहे थे तो बहुत से लोग अपने-अपने काम पर जा चुके थे। इसी बीच दोपहर करीब बारह बजे आलम के घर में हुए जोरदार विस्फोट से स्थानीय लोग सिहर उठे। एक पल को उन्हें कुछ समझ में नहीं आया और अगले क्षणों में हुए अन्य धमाकों ने स्थानीय लोगों को ही नहीं बल्कि उनके घरों की दीवारों तक हिला दिया। वे भागकर घरों से बाहर आ गए। स्थानीय लोग आलम के दरवाजे पहुंचे तो सामने खौफनाक मंजर देख दिल दहल गए।
आलम का मकान और छत जमींदोज था। कई लोग मलबे में दबे थे और धमाके से मकान की छतें चकानाचूर थी। बारूद की महक सांस में बाधा बन रही थी तो वहां चीख-पुकार थी। शरीर के चिथड़े उड़ गए थे। अगल-बगल के मकानों की दीवारें हिल गई थी। मौके पर पहुंची पुलिस स्थानीय लोगों की मदद से घायलों को काफी मशक्कत के बाद मलबे से बाहर निकलवाया और उन्हें अस्पताल भिजवाया। पुलिस के आने से पहले कई स्थानीय हौसला से आगे बढ़कर आलम के घर में दाखिल हो चुके थे। स्थानीय लोगों ने पुलिस की मदद से आनन-फानन में घायलों को अस्पताल भिजवाया जहां आलम सहित कुछ लोगों की मौत हो चुकी थी। जिलाधिकारी ने दो लोगों के मौत होने की पुष्टि की, लेकिन घटनास्थल साफ बयां कर रहा है कि मौत बढ़ सकती है।
एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि आलम के घर में पटाखा बनाने का पुश्तैनी है। हालांकि पुलिस-प्रशासन की सक्रियता पर गौर करें तो इससे पहले भी राजधानी लखनऊ में अवैध पटाखा कारखाने में विस्फोट में कईयों लोगों की जाने जा चुकी हैं। मोहनलालगंज क्षेत्र, चिनहट इलाके में, पारा, गोसाईगंज, काकोरी सहित कई इलाकों में विस्फोट होने से कईयों लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन जिम्मेदार अफसरों को नींद उस समय टूटती है जब कोई और घटना हो जाती है।
