स्मृति शेष… कितने किस्म के हिन्दू !

61Dis0qCHtL. AC UF10001000 QL80

श्राद्ध का गंगाजमुनी हिन्दू उपहास करते हैं। छद्म आस्थावान छिपे-सहमे रीति से परिपाटी निभाते हैं। कई श्रद्धालु एक दफा जीवन में गया-तीर्थ जाने के बाद निबट जाते हैं। किन्तु बहुतायत में अन्य जन सारी रस्में मन से निभाते हैं। इसी आखिरी समूह का तरीका मुझे बहुत भाता है।

पुरखों का आदर मरणोपरांत भी करना यह दर्शाता है कि नयी पीढ़ी कृतघ्न नहीं है। ऐसे मृत्यु के पश्चात वाले आचरण हमें सूर्योपासक पारसियों, ख्रिस्तीजन, जैन तथा बौद्धों से सीखना चाहिए। वे अपने सभी निर्देशित रस्मों का विधि-विधान के अनुसार निर्वहन करते हैं।

अर्थात पुण्यकर्म से लाज, हिचक क्यों ?

यहाँ पाँचवे मुग़ल बादशाह शाहाबुद्दीन मुहम्मद शाहजहाँ (खुर्रम) की उक्ति का जिक्र कर दूं। श्राद्ध पद्धति का उल्लेख अतीव व्यथा से शाहजहाँ ने किया था। अपने बेटे औरंगजेब आलमगीर से बादशाह ने कहा, “हिन्दुओं से सीखो। वे अपने मरे हुए वालिद (पिता) को भी तर्पण में पानी पिलाते हैं और तुम हो कि अपने जीवित पिता को टूटे घड़े में आधा भरकर ही पानी देते हो, प्यासा रखते हो !” बाप से बेटे ने गद्दी हथियाते ही आगरा के किले में बादशाह को कैद कर रखा था।

मसलन पारंपरिक रिश्ते निभाने में हिन्दू को शहंशाह ने बहुत बेहतर बताया था।

आर्यसमाजी भी हिन्दुओं में होते हैं जो मूर्ति-भंजक (इस्लामिस्टों की भांति बुतशिकन) हैं। वे श्राद्ध का बहिष्कार करते हैं। हालाँकि वे वेदोक्त रीतियों को तो मानते हैं। मगर यह नही स्वीकारते कि अथर्ववेद (18-2-49) में उल्लिखित है कि पूर्वजों का स्मरण करना चाहिए : “येनः पितु: पितरो ये पितामहा तेभ्यः पितृभ्यो नमसा विधेम।”
हिन्दू संप्रदाय के समाजशास्त्रीय प्रबंधन हेतु यह प्रथाएं रची गई थीं। किन्तु नौ सदियों तक के इस्लामी राज में नगरीय क्षेत्रों से ये परम्पराएँ लुप्तप्राय हो गयी हैं। आंचलिक क्षेत्रों में दिखती हैं।

पिण्डदान के विषय में कई भारतीयों के भ्रम को दूर करने हेतु मैं लन्दन के एक महान वैज्ञानिक का अनुभव बता दूं। चूँकि वह गोरा अंग्रेज था तो हम गेहुंए भारतीय, युगों से दासता से ग्रसित रहे, तो शायद विचार करलें और मान भी लें कि आत्माएं होती हैं और विचरण करती रहती हैं। उनसे संवाद संभव है। आत्मिक सुधार हेतु सहायता भी।

इसी सन्दर्भ में लखनऊ विश्वविद्यालय में साइकोलॉजी विभाग के हमारे एक साथी ने कभी (1959) एक लेख का उल्लेख किया जिसे ब्रिटेन के महान भौतिक शास्त्री लार्ड जॉन विलियम्स स्ट्रट रेले ने लिखा था। जॉन विलियम्स को 1904 में भौतिकी का नोबेल पुरस्कार मिला था। वे बड़े धर्मनिष्ठ थे और पराविज्ञान में निष्णात थे। प्लैंशेट (Planchet) पर वे बहुधा अपने दिवंगत इकलौते पुत्र से संवाद करते थे।

एक बार पुत्र ने उन्हें बताया कि वह एक अत्यंत ज्वलनशील स्थान पर है। मगर भारतीय आत्माएं यहाँ से शीघ्र मुक्ति पा लेती थीं क्योंकि उनके भूलोकवासी रिश्तेदार आटे एवं चावल और तिल से गेंदनुमा ग्रास बनाकर कोई रस्म अदा करते थे। अर्थात पिंडदान ही रहा होगा। अतः अब श्राद्ध प्रथा में यकीन करना होगा।

(यह लेख के. विक्रम राव साहब ने 11 सितम्बर 2020 को लिखा था।)

Spread the love

Uttar Pradesh

80 वें स्वतंत्रता दिवस पर विधायक ऋषि त्रिपाठी ने दर्जनों स्कूलों व प्रतिष्ठानों में किया ध्वजारोहण

नौतनवां में विधायक ऋषि त्रिपाठी ने किया ध्वजारोहण उमेश चन्द्र त्रिपाठी नौतनवां महराजगंज! 80 वें स्वतंत्रता दिवस के पावन पर्व पर नौतनवां विधानसभा क्षेत्र में देशभक्ति और राष्ट्र-प्रेम का उत्साह देखने को मिला। Rishi Tripathi Flag Hoisting : क्षेत्रीय विधायक ऋषि त्रिपाठी ने विभिन्न स्कूलों, शिक्षण संस्थानों एवं प्रतिष्ठानों में पहुंचकर ध्वजारोहण किया और लोगों […]

Spread the love
Read More
BHU
homeslider Uttar Pradesh

BHU कैंपस में आवारा कुत्ते का 11 साल के बच्चे पर हमला, चेहरे और सिर पर लगे 50 टांके

सुरक्षित नहीं रही महामना की बगिया, दुनिया के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थान में कुत्तों का आतंक बनारस हिंदू विश्वविद्यालय कैंपस में मासूम पर टूट पड़े कुत्ते, फिर जो हुआ सुनकर फट जाएगा कलेजा वाराणसी। BHU कैंपस में मॉर्निंग वॉक के दौरान 11 साल के बच्चे पर आवारा कुत्ते ने हमला कर दिया। कुत्ते ने बच्चे को करीब […]

Spread the love
Read More
Uttar Pradesh

670 पुलिसकर्मियों को मिलेगा DJP का सम्मान चिन्ह

उत्कृष्ट सेवा सम्मान चिन्ह सराहनीय सेवा सम्मान चिन्ह और “प्रशंसा चिन्ह” से होंगे सम्मानित सेवा अभिलेख और शौर्य के आधार पर चयन ए अहमद सौदागर 670 police personnel to receive DGP’s Commendation : स्वतंत्रता दिवस 2026 के मौके पर पुलिस महानिदेशक द्वारा प्रदेश के कुल 670 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को डीजीपी के सम्मान चिन्ह […]

Spread the love
Read More