ओहदेदारों की नीयत शक के दायरे में, स्थानीय पुलिस प्रशासन की भूमिका पर संदेह

  •  जांच पर जांच फिर भी कथित बाबा आजाद 
  • हाथरस में हुई घटना का मामला, कार्यवाई ठप्प

ए अहमद सौदागर

लखनऊ। ओहदेदारों की नीयत एक बार फिर शक के दायरे में है। वजह कि हाथरस कांड को लेकर चल रही जांच में यह बात सामने आई है कि सत्संग में जुटी भीड़ को किसने और कितने लोगों के शामिल होने की अनुमति दी थी।

लाख डेढ़ लाख की भीड़ जमा होने के बावजूद इस मामले पुलिस प्रशासन ने क्यों नहीं संज्ञान में लिया ॽ इतना ही नहीं काफी दिनों से यहां भीड़ इकट्ठा होती थी बावजूद इसके स्थानीय पुलिस प्रशासन बेखबर क्यों रहा ॽ सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर कथित बाबा पुलिस प्रशासन क्यों आंख मूंद रखा था ॽ

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दर्दनाक हादसे को लेकर बेहद गंभीर हैं और स्थानीय पुलिस प्रशासन को तलब किया है। यही नहीं मुख्यमंत्री ने जांच कमेटी गठित कर जल्द से जल्द रिपोर्ट दिए जाने के निर्देश दिए हैं।

तर्क बेमानी: बचाव में यह तर्क दिए जा सकते हैं जब तक किसी तह तक न पहुंचे उसे आरोपी कैसे मान लिया जाए ॽ

गिरफ्तारी के बाद खुली पोल

सत्संग आयोजन समिति से जुड़े चार व्यक्ति और दो महिलाएं शामिल हैं। पुलिस ने मुख्य आयोजक देव प्रकाश मधुकर की गिरफ्तारी पर एक लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा है।

इस मामले में पुलिस ने मैनपुरी निवासी राम लडैते यादव, हाथरस निवासी मंजू यादव, फिरोजाबाद निवासी उपेन्द्र सिंह यादव, हाथरस निवासी मंजू देवी यादव, हाथरस निवासी मेघ सिंह व हाथरस निवासी मुकेश कुमार को गिरफ्तार किया है।

बताया जा रहा है कि ये लोग श्रधालुओं को भोले बाबा के चरण रज लेने के लिए अनियंत्रित छोड़ दिया था, जिसके चलते भगदड़ मच गई थी और इस लापरवाही के चलते कई घरों में मातम छा गया।

अनुमति देने में कौन था मददगार

अहम सवाल है कि हाथरस के सिकंद्राराऊ क्षेत्र में अधिक भीड़ जमा कराने वाले भोले बाबा की सीधी प्रशासन में पहुंच थी या किसी के जरिए अनुमति मिलती थी, अनुमति के लिए किसने पैरवी की थी। किसके दबाव में यहां भीड़ इकट्ठा होती थी लिहाजा यह सवाल हर किसी को बेचैन कर रहा है।

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