
Sunil Lodhi : सूरदास पहले ही नहीं हुए, अब भी होते हैं। भक्तिकाल में जन्मांध सूरदास ने श्रीकृष्ण की लीलाओं के जिस तरह वर्णन किये, जन्म से लेकर युवावस्था का जो कलाएं गाईं, माखन चोरी, रीझना-रिझाना, छेड़छाड़ एकदम जैसे आंखों देखा हाल, शायद कोई त्रिनेत्रधारी भी नहीं गा सकता था। उन्होंने जिस तरह कृष्ण लीलाओं का जीवंत वर्णन किया है कि लोग उनको जन्मांध मानने तक से इनकार कर देते हैं। लेकिन इसका उत्तर उन्होंने दिया है- हाथ छुड़ाये जात हौ निबल जानि कै मोंहिं, हृदय से जब जाहुगे तब मैं जानउं तोहिं। उनका कौन सा ऐसा पद है जो संगीत के किसी न किसी राग में निबद्ध न हो। ठीक ऐसे ही हैं बुंदेलखंड में एक सूरदास, जिनकी आंखों ने कभी सूरज की रोशनी नहीं देखी। बुंदेलखंड के इन 25 वर्षीय ‘सूरदास’ सुनील लोधी की आवाज आज पूरे देश में गूंज रही है। रास्ता भटकने पर भंवरे की गूंज से घर पहुंचने वाले सुनील का भजन ‘मैंने तेरे ही भरोसे हनुमान…’ अब बॉलीवुड फिल्म ‘हनुमान अंश’ का मुख्य गीत बन चुका है, जिस पर इंस्टाग्राम पर लाखों रील्स बन रही हैं।
मध्यप्रदेश के सागर के छोटे से गांव अगरा के सुनील लोधी की जिंदगी सिर्फ सुरों की नहीं, बल्कि चमत्कारिक विश्वास की मिसाल है। सुनील बताते हैं कि एक बार वे गांव के नाले के पास रास्ता भटक गए थे। जब उन्होंने हारकर ईश्वर से शिकायत की, तभी एक भंवरा उनके कान के पास मंडराने लगा। सुनील ने भंवरे की आवाज की दिशा पकड़ी और सही-सलामत घर पहुंच गए। इसी अटूट भक्ति ने उनके भजनों में वह रूहानियत भरी, जिसने आज करोड़ों दिलों को छू लिया है। आज उनकी रचनाएं, उनका तमूरा फिल्म जगत से लेकर पूरे बुंदेलखंड में सुनाई देता है। घर और पड़ोस के लोग ही उनका सहारा बनते हैं। कहीं भी जाने के लिए, कुछ भी रोजमर्रा के कामों के लिए उन्हें इन्हीं स्वजनों का सहारा मिलता है। लेकिन वे इस बात को कहते नहीं थकते कि एक भौंरे के सुरों ने उन्हें यह राह दिखाई है और वे इसी राह पर चलते रहेंगे।
यह सुनील लोधी की अनूठी लोक गायिकी ही है, जिसके कारण उन्हें बुंदेलखंड का सूरदास कहा जाता है। कभी दुनिया न देख पाने वाले सुनील ने बचपन से ही संगीत को अपना सब कुछ माना और हाथ में तमूरा लेकर स्थानीय सत्संगों तथा कार्यक्रमों में पारंपरिक भजन गाए। उनका पारंपरिक बुंदेली हनुमान भजन “मोरे संकट के कटैया हनुमान” और “मैंने तेरे ही भरोसे…” सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ। उन्होंने कभी स्वप्न में भी नहीं सोचा था कि एक दिन उनकी आवाज बॉलीवुड तक पहुंचेगी। उनकी इसी लोक-भक्ति और अनूठी आवाज से प्रभावित होकर निर्देशक विशाल चतुर्वेदी ने उन्हें नीम करोली बाबा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘हनुमान अंश’ में अवसर दिया, जहाँ उनका भजन मुख्य गीत के रूप में शामिल हुआ।
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