बृजमोहन अग्रवाल-IAS विवाद पर भूपेश बघेल का बड़ा हमला, सरकार से पूछे तीखे सवाल

Brijmohan Agrawal IAS controversy

Brijmohan Agrawal IAS controversy : रायपुर से BJP सांसद बृजमोहन अग्रवाल और छत्तीसगढ़ स्वास्थ्य विभाग के सचिव IAS अमित कटारिया के बीच कथित बातचीत को लेकर शुरू हुआ विवाद अब राजनीतिक रंग ले चुका है। इस मामले में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए प्रशासनिक व्यवस्था और जनप्रतिनिधियों के सम्मान को लेकर कई सवाल उठाए हैं। वहीं, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत लोकसभा अध्यक्ष से करते हुए मामले को विशेषाधिकार समिति के पास भेजने की मांग की है।

जानकारी के अनुसार, सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने जनहित से जुड़े कई मुद्दों पर स्वास्थ्य विभाग को पत्र लिखे थे। उनका आरोप है कि विभाग की ओर से समय पर कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद उन्होंने स्वास्थ्य विभाग के सचिव अमित कटारिया से फोन पर संपर्क किया। सांसद का दावा है कि बातचीत के दौरान सचिव का व्यवहार संसदीय गरिमा और प्रशासनिक शिष्टाचार के अनुरूप नहीं था। इसी आधार पर उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को लिखित शिकायत भेजते हुए मामले की जांच कराने की मांग की।

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इस घटनाक्रम के सामने आने के बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सरकार को घेरते हुए कहा कि किसी निर्वाचित जनप्रतिनिधि के साथ इस तरह का व्यवहार लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अलग विषय हैं, लेकिन जनता द्वारा चुने गए प्रतिनिधि का सम्मान हर परिस्थिति में होना चाहिए। बघेल ने कहा कि बृजमोहन लोकसभा सदस्य हैं और रायपुर की जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं, इसलिए उनके साथ कथित रूप से असम्मानजनक व्यवहार लोकतंत्र की भावना के अनुरूप नहीं माना जा सकता।

भूपेश ने अपने बयान में राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश की नौकरशाही स्थानीय सरकार की बजाय दिल्ली और नागपुर के प्रभाव में काम करती दिखाई दे रही है। उनके अनुसार, यदि अधिकारी जनप्रतिनिधियों की बातों को गंभीरता से नहीं लेते, तो इससे जनता के मुद्दों की भी अनदेखी होती है। उन्होंने प्रशासनिक जवाबदेही तय करने और व्यवस्था में पारदर्शिता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

पूर्व मुख्यमंत्री ने बृजमोहन अग्रवाल के लंबे राजनीतिक अनुभव का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि अग्रवाल कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभा चुके हैं और प्रशासनिक व्यवस्था को अच्छी तरह समझते हैं। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि सांसद अपने मतदाताओं के हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उचित कदम उठाएंगे।

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