
Bob Blair Death : न्यूजीलैंड क्रिकेट के इतिहास के सबसे प्रेरणादायक खिलाड़ियों में शुमार पूर्व तेज गेंदबाज बॉब ब्लेयर का 94वें जन्मदिन पर निधन हो गया। क्रिकेट जगत में उनके निधन की खबर से शोक की लहर दौड़ गई है। न्यूजीलैंड क्रिकेट बोर्ड ने महान खिलाड़ी को श्रद्धांजलि देते हुए उनके योगदान को अमूल्य बताया है। बॉब ब्लेयर सिर्फ अपने प्रदर्शन के लिए नहीं, बल्कि अदम्य साहस और खेल भावना के लिए भी याद किए जाते हैं। निजी जिंदगी के सबसे दर्दनाक क्षण में भी उन्होंने क्रिकेट के प्रति अपनी प्रतिबद्धता का ऐसा उदाहरण पेश किया, जिसे आज भी खेल इतिहास के सबसे भावुक पलों में गिना जाता है।
मंगेतर की मौत की खबर, फिर भी टीम के लिए उतरे मैदान पर
साल 1953 में न्यूजीलैंड टीम दक्षिण अफ्रीका दौरे पर थी। एलिस पार्क में खेले जा रहे टेस्ट मैच के दौरान 21 वर्षीय ब्लेयर को यह दुखद खबर मिली कि उनकी मंगेतर नेरिसा लव टांगीवाई रेल हादसे में मारी गई हैं। इस भीषण दुर्घटना में 151 लोगों की जान गई थी। इस खबर के बाद ब्लेयर गहरे सदमे में थे और टीम होटल में शोक मना रहे थे। लेकिन जब न्यूजीलैंड की टीम संकट में फंस गई और आखिरी विकेट बचा था, तब उन्होंने व्यक्तिगत दुख को पीछे छोड़ टीम का साथ देने का फैसला किया।
जब पूरा स्टेडियम खड़ा हो गया
एलिस पार्क स्टेडियम में मौजूद हजारों दर्शक उस समय भावुक हो गए, जब ब्लेयर बल्लेबाजी के लिए मैदान पर उतरे। दूसरे छोर पर बर्ट सटक्लिफ मौजूद थे। दोनों खिलाड़ियों ने आखिरी विकेट के लिए 33 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की।
इस दौरान एक ओवर में 25 रन बने, जो उस समय विश्व रिकॉर्ड था। जब ब्लेयर आउट होकर लौटे, तो पूरे स्टेडियम ने खड़े होकर तालियों की गड़गड़ाहट से उनका सम्मान किया। यह दृश्य क्रिकेट इतिहास के सबसे भावुक और प्रेरणादायक क्षणों में शामिल हो गया।

न्यूजीलैंड के लिए 43 टेस्ट विकेट
बॉब ब्लेयर ने 1952 से 1964 के बीच न्यूजीलैंड के लिए 19 टेस्ट मैच खेले और 43 विकेट हासिल किए। वहीं फर्स्ट क्लास क्रिकेट में उन्होंने 59 मुकाबलों में 330 विकेट लेकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया।
1956-57 का घरेलू सीजन उनके करियर का स्वर्णिम दौर माना जाता है। इस दौरान उन्होंने सिर्फ 9 की औसत से 46 विकेट झटके और दो बार एक पारी में 9 विकेट लेने का कारनामा किया।
टांगीवाई शील्ड से अमर हुई कहानी
ब्लेयर की साहसिक कहानी ने न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका क्रिकेट को इतना प्रभावित किया कि 2024 में दोनों देशों के बीच टेस्ट सीरीज के लिए ‘टांगीवाई शील्ड’ की शुरुआत की गई। यह ट्रॉफी उस ऐतिहासिक घटना और ब्लेयर की याद में बनाई गई थी।
आखिरी सांस तक क्रिकेट से जुड़े रहे
1964 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अपने अंतिम टेस्ट में ब्लेयर ने सात विकेट लेकर करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। क्रिकेट के प्रति उनका जुनून कभी कम नहीं हुआ। 60 वर्ष की उम्र के बाद भी उन्होंने खेलना जारी रखा और चार दशक से अधिक समय तक क्रिकेट से जुड़े रहे। खेल से संन्यास लेने के बाद उन्होंने इंग्लैंड, दक्षिण अफ्रीका, जिम्बाब्वे, नॉर्दर्न आयरलैंड और ऑस्ट्रेलिया में कोच के रूप में भी सेवाएं दीं।
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