
India’s LNG and LPG Imports : भारत की ऊर्जा खरीद व्यवस्था में हाल ही में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने न केवल वैश्विक तेल-गैस बाजार को प्रभावित किया है, बल्कि भारत की सप्लाई चेन को भी पूरी तरह बदल दिया है। जहां पहले भारत अपनी LPG जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर था, वहीं अब अमेरिका तेजी से भारत का सबसे बड़ा LPG सप्लायर बनकर उभरा है।
अमेरिका की हिस्सेदारी में भारी बढ़ोतरी
डेटा एनालिटिक्स फर्म केप्लर के अनुसार, मई 2026 में भारत के कुल LPG आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी बढ़कर 55% तक पहुंच गई। यह फरवरी में केवल 14% थी। यानी कुछ ही महीनों में अमेरिका ने भारतीय LPG बाजार में मजबूत पकड़ बना ली है। मई में अमेरिका से LPG निर्यात 73% बढ़कर लगभग 6.66 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गया, जिससे खाड़ी देशों की कमी की भरपाई हो सकी।
खाड़ी देशों की बादशाहत कमजोर हुई
भारत लंबे समय से संयुक्त अरब अमीरात (UAE), सऊदी अरब, कुवैत और कतर जैसे देशों पर LPG के लिए निर्भर रहा है। लेकिन हाल के संघर्ष और आपूर्ति बाधाओं के कारण इन देशों की हिस्सेदारी तेजी से गिर गई है। फरवरी में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी: 81% मई में खाड़ी देशों की हिस्सेदारी: 16% यह गिरावट वैश्विक ऊर्जा राजनीति में बड़े बदलाव का संकेत देती है।
संघर्ष और होर्मुज स्ट्रेट का असर
पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर तनाव और युद्ध जैसी स्थिति ने समुद्री सप्लाई चेन को प्रभावित किया है। होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में बाधा आने से तेल और गैस की आवाजाही पर गंभीर असर पड़ा है। इसका सीधा प्रभाव भारत की ऊर्जा खरीद पर भी पड़ा है।
भारत की ऊर्जा नीति में बदलाव
सप्लाई संकट को देखते हुए भारत सरकार ने घरेलू स्तर पर कई कदम उठाए हैं: PNG कनेक्शन वाले उपभोक्ताओं पर LPG सिलेंडर उपयोग सीमित किया गया कुछ उद्योगों को LPG सप्लाई कम की गई घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया गया भारत का LPG उत्पादन लगभग 35,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन से बढ़कर 50,000–52,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन तक पहुंच गया है।
अब भी आयात पर भारी निर्भरता
हालांकि घरेलू उत्पादन बढ़ा है, फिर भी भारत अपनी कुल LPG जरूरतों का लगभग 60% हिस्सा आयात से पूरा करता है। इससे स्पष्ट है कि वैश्विक बाजार पर भारत की निर्भरता अभी भी बनी हुई है।
तेल आयात में रूस की भूमिका
LPG के साथ-साथ कच्चे तेल के आयात में भी बड़ा बदलाव देखने को मिला है। मई में रूस से तेल आयात 24% बढ़कर 19.5 लाख बैरल प्रतिदिन पहुंच गया। रूस भारत का सबसे बड़ा तेल आपूर्तिकर्ता बना हुआ है, क्योंकि यह सस्ता और स्थिर सप्लाई विकल्प प्रदान कर रहा है।
नए सप्लाई स्रोतों की ओर भारत
भारत ने अब अन्य देशों से भी तेल आयात बढ़ाया है: ओमान से आयात में 179% की वृद्धि वेनेजुएला से भी खरीद में बढ़ोतरी यह दिखाता है कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सप्लाई डाइवर्सिफिकेशन की रणनीति अपना रहा है।
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