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यह आपूर्ति ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका ने सीमित अवधि के लिए ईरानी तेल की बिक्री पर छूट दी है। इस फैसले का मकसद वैश्विक तेल आपूर्ति को स्थिर रखना और कीमतों में बढ़ोतरी को रोकना है। हालांकि, इन टैंकरों के खरीदारों को लेकर अब तक आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन पारादीप और सिक्का जैसे प्रमुख बंदरगाहों पर बड़ी कंपनियों की मौजूदगी से यह संकेत मिलता है कि प्रमुख भारतीय रिफाइनरियां इसमें शामिल हो सकती हैं।
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इससे पहले एक अन्य टैंकर ‘पिंग शुन’ भी भारत की ओर रवाना हुआ था, लेकिन आर्थिक कारणों के चलते उसे चीन भेज दिया गया। यह घटना अंतरराष्ट्रीय व्यापार में आने वाली जटिलताओं को दर्शाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरानी तेल की यह वापसी भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति को मजबूत करने का अवसर है। हालांकि, भविष्य में यह स्थिति वैश्विक राजनीति और प्रतिबंधों पर निर्भर करेगी।
