- तीन सिपाहियों को पुलिस ने किया गिरफ्तार,
- बिहार तक फैला हो सकता है यह गोरखधंधा,
- सिपाहियों ने फर्जी बिल से वेतन, भत्ता के नाम पर निकाल लिये ₹15.41 करोड़,
- बोकारो पुलिस के लेखापाल ने पोर्टल में छेड़छाड़ कर पत्नी को ट्रान्सफर कर दिए साढ़े4 करोड़ रुपए,
रंजन कुमार सिंह
रांची। बोकारो ट्रेजरी से 4.29 करोड़ रुपए की फर्जी निकासी का मामला पकड़ में आने के बाद अब हजारीबाग में भी बड़ी गड़बड़ी का मामला सामने आया है। हजारीबाग पुलिस विभाग में 15.41 करोड़ रुपए की गड़बड़ी का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने अपने लेखा शाखा में कार्यरत तीन सिपाही रजनीश कुमार सिंह, धीरेंद्र कुमार सिंह और शंभु कुमार को गिरफ्तार कर लिया है। तीनों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। जांच के बाद 21 संदिग्ध बैंकों खातों को फ्रीज कर दिया गया है। इन खातों में 1.60 करोड़ रुपए जमा हैं। इस मामले में तीन की गिरफ्तारी हुई है। जिसमें शंभू कुमार को मास्टरमाइंड माना जा रहा है।

आठ साल में ₹15,41,41,485 के संदिग्ध ट्रांजेक्शन
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब ट्रेजरी निदेशालय ने जिला कोषागार को अलर्ट जारी किया। निदेशालय ने बताया कि दो बैंक खातों में पिछले आठ वर्षों के दौरान ₹15,41,41,485 के संदिग्ध ट्रांजेक्शन हुए हैं। इस सूचना के बाद जिला प्रशासन ने अपर समाहर्ता की अध्यक्षता में चार सदस्यीय जांच टीम गठित की। जांच में सामने आया कि अस्थायी पे-आईडी बनाकर सिस्टम की प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए फर्जी बिल पास किए गए। सरकारी राशि की निकासी कर उसे अलग-अलग खातों में ट्रांसफर किया गया। इस मामले में जिला कोषागार पदाधिकारी की शिकायत पर लोहसिंगना थाना में एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस पूछताछ में तीनों आरोपियों ने अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली है। इस पूरे मामले में शंभु को मास्टर माइंड बताया जा रहा है।
घोटाले की अन्य एजेंसी से हो सकती है जांच: वित्त मंत्री
बोकारो-हजारीबाग ट्रेजरी घोटाला मामले में वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन असम दौरे से लौट आए हैं। इस मुद्दे पर उनसे चर्चा की जाएगी। एक के बाद दूसरे जिले में इस तरह की घटनाएं सामने आना चिंताजनक है, इसलिए इसकी जांच राज्य की किसी अन्य एजेंसी से कराई जानी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार चेक एंड बैलेंस सिस्टम को पूरी तरह दुरुस्त करने पर मंथन कर रही है, ताकि भविष्य में ऐसी गड़बड़ियों की कोई गुंजाइश न रहे।

बोकारो में हुए घोटाले से खुली परतें, अब नए खुलासे
इस मामले का खुलासा तब हुआ जब बोकारो पुलिस की लेखा शाखा का लेखापाल कौशल पांडेय घोटाला करते पकड़ा गया। उसने कुबेर पोर्टल पर छेड़छाड़ कर 4 करोड़ 29 लाख 71 हजार रुपए की अवैध निकासी कर उक्त राशि सीधे पत्नी अनु पांडेय के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी थी। इस मामले के सामने आने के बाद पुलिस एसोसिएशन ने सभी जिलों में इस तरह की गड़बड़ी की आशंका जताते हुए जांच की मांग की थी। मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने सभी जिलों में ट्रेजरी की जांच कराने का निर्देश दिया। उसी के आधार पर हजारीबाग में भी जांच शुरू हुई। जांच में सामने आया कि यह घोटाला कई महीनों से योजनाबद्ध तरीके से चल रहा था। वेतन, भत्ता और अन्य मदों के नाम पर फर्जी बिल तैयार कर सरकारी खजाने से रकम निकाली जा रही थी। जांच टीम को कई संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन, फर्जी वाउचर और कागजात मिले हैं, जिनसे संकेत मिलता है कि यह नेटवर्क बिहार और झारखंड तक फैला हो सकता है।

मुख्य सचिव ने सभी जिलों में जांच कराने का निर्देश दिया
मुख्य सचिव अविनाश कुमार ने बुधवार को वित्त सचिव प्रशांत कुमार व अन्य अधिकारियों संग बैठक की। कहा- वित्त विभाग यह सुनिश्चित करे कि ट्रेजरी का चेक एंड बैलेंस सिस्टम किसी भी स्थिति में गड़बड़ न हो। आशंका जताई कि अन्य जिलों में भी ऐसी गड़बड़ियां हो सकती हैं। इसलिए सभी जिलों में ट्रेजरी की जांच कराने का निर्देश दिया।
पीएल अकाउंट और एसी- डीसी बिल पर अब सख्ती
मुख्य सचिव ने यह भी निर्देश दिया कि जिन पीएल अकाउंट में राशि रखी गई है, उसकी निकासी 15 दिनों में कर ली जाए। जहां तत्काल खर्च की जरूरत नहीं है, वहां की राशि वापस ट्रेजरी खाते में जमा कराई जाए। उन्होंने कहा कि अग्रिम बिल के बदले डीसी बिल जल्द जमा किए जाएं, ताकि वित्तीय अनुशासन बना रहे।
