पिछले साल फिल्म इंडस्ट्री से एक भावुक खबर सामने आई, जब दिग्गज अभिनेत्री जरीन खान का निधन हो गया। मुंबई स्थित उनके घर पर उन्होंने अंतिम सांस ली। लेकिन उनके निधन के बाद जो तस्वीरें सामने आईं, उन्होंने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी। तस्वीरों में उनके बेटे ज़ायेद खान, हिंदू रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी मां का अंतिम संस्कार करते नजर आए। बस यही बात कुछ लोगों को रास नहीं आई और उन्होंने एक्टर को ट्रोल करना शुरू कर दिया। सवाल उठाए गए कि एक पारसी मूल की महिला और मुस्लिम परिवार से जुड़े होने के बावजूद ऐसा क्यों किया गया।
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हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में जायेद खान ने इस पूरे विवाद पर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि यह फैसला किसी परंपरा या दबाव के कारण नहीं, बल्कि उनकी मां की आखिरी इच्छा के सम्मान में लिया गया था। उन्होंने बताया कि एक बार उनकी मां नदी किनारे बैठी थीं और उन्होंने इच्छा जताई थी कि उनकी अस्थियां किसी नदी में प्रवाहित की जाएं। जायेद ने भावुक होते हुए कहा कि मां की इच्छा उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण थी। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता कि लोग क्या सोचते हैं या क्या कहते हैं। उनके लिए अपनी मां की इच्छा पूरी करना ही सबसे बड़ा कर्तव्य था।
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उन्होंने अपने परिवार के विचारों को भी साझा किया और बताया कि उनके घर में धर्म से ज्यादा इंसानियत को महत्व दिया जाता है। उन्होंने कहा कि उनका परिवार खुद को धर्मनिरपेक्ष मानता है और हर व्यक्ति को अपनी आस्था चुनने का अधिकार होना चाहिए। जरीन खान का फिल्मी सफर भी काफी दिलचस्प रहा। उन्होंने 1963 में Dev Anand के साथ फिल्म तेरे घर के सामने में काम किया था। बाद में उन्होंने Sanjay Khan से शादी की। 7 नवंबर को उनका निधन उम्र से जुड़ी बीमारियों के कारण हुआ। लेकिन उनके जाने के बाद भी उन्होंने अपने परिवार को एक महत्वपूर्ण संदेश दिया -धर्म से ऊपर इंसानियत।
