
संतकबीरनगर/खलीलाबाद। मौसम ने अब करवट ले ली है। बसंत की विदाई के साथ ही ग्रीष्म ने अपनी अंगड़ाई भर ली है और धूप के तेज होते तेवर जीवन में तपिश का एहसास कराने लगे हैं। सुबह-शाम की हल्की ठंडक अब भी बनी हुई है, लेकिन दिन की धूप साफ संकेत दे रही है कि गर्मी ने दस्तक दे दी है।
रात में कभी पंखा चलाने की जरूरत महसूस होती है, तो कभी हल्की चादर ओढ़नी पड़ती है। मौसम के इस बदलते मिजाज के बीच मच्छरों की सक्रियता भी बढ़ गई है, जिससे लोगों की परेशानी बढ़ने लगी है।
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चैत बीतते ही वैशाख का आगमन हो चुका है। खेतों में फसल कटाई का काम तेजी से चल रहा है और खलिहान अनाज से सजने लगे हैं। आम के पेड़ों पर बौर आने से बागों की छांव भी मन को सुकून दे रही है।
इधर गांव-शहर में शादियों का मौसम भी पूरे शबाब पर है। बैंड-बाजों की गूंज, मंगल गीतों की मधुर ध्वनि और नए-नए परिधानों में सजी ललनाओं की रौनक हर आंगन को चहका रही है। बारातों की शोभा देखते ही बनती है।
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धार्मिक आयोजनों की भी भरमार है। कहीं जनेऊ संस्कार हो रहे हैं, तो कहीं चौल, कथा और पूजा-पाठ के कार्यक्रम। मंदिरों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है और कई स्थानों पर जेवनार (भंडारे) का आयोजन हो रहा है।
कुल मिलाकर, मौसम के इस परिवर्तन ने जहां एक ओर गर्मी का एहसास बढ़ाया है, वहीं दूसरी ओर सामाजिक और धार्मिक आयोजनों की चहल-पहल ने वातावरण को जीवंत बना दिया है।
