मियामी/वॉशिंगटन । अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मियामी में समर्थकों को संबोधित करते हुए एक बार फिर ईरान और वैश्विक राजनीति को लेकर बड़े और विवादित बयान दिए हैं। ट्रंप ने दावा किया कि ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ के जरिए ईरान की सैन्य ताकत को काफी हद तक कमजोर कर दिया गया है और अब वह समझौते के लिए दबाव में है। भाषण के दौरान ट्रंप ने मजाकिया अंदाज में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को ‘स्ट्रेट ऑफ ट्रंप’ तक कह दिया, जो अब चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अगर उन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार नहीं मिला, तो फिर किसी को भी नहीं मिलना चाहिए।
ट्रंप ने आगे संकेत दिए कि आने वाले समय में क्यूबा अगला टारगेट हो सकता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता बढ़ गई है। उन्होंने अपने पहले कार्यकाल में ईरानी कमांडर कासिम सुलेमानी पर हुए हमले का जिक्र करते हुए इसे बड़ी उपलब्धि बताया। अपने बयान में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के पास दुनिया की सबसे ताकतवर सेना है और ऐसे हथियार हैं, जिनके बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अमेरिका कई सैन्य टारगेट्स पर कार्रवाई की तैयारी में है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने खाड़ी में चल रहे संघर्ष को लेकर कहा कि यह युद्ध अगले कुछ हफ्तों में खत्म हो सकता है
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उन्होंने जोर देकर कहा कि यह महीनों तक नहीं चलेगा। रुबियो की यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब वॉशिंगटन प्रशासन तेहरान के साथ बैकचैनल बातचीत कर रहा है और मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है। इसके साथ ही G7 के विदेश मंत्रियों की फ्रांस में हुई बैठक में ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से जहाजों की आवाजाही पर भी चर्चा हुई। रुबियो ने जमीनी अभियान की संभावना को कम बताते हुए कहा कि अमेरिका बिना लंबे जमीनी युद्ध के भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकता है। ट्रंप और रुबियो के इन बयानों के बाद मिडिल ईस्ट की स्थिति और वैश्विक राजनीति पर नजरें टिक गई हैं।
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