वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल देखने को मिला है। गुरुवार को ब्रेंट क्रूड $103 प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जिससे निवेशकों और अर्थशास्त्रियों के बीच चिंता बढ़ गई है। इस तेजी की मुख्य वजह ईरान का अमेरिका के साथ सीधे संवाद से इनकार करना माना जा रहा है। हाल ही में दिए गए बयान में ईरान के विदेश मंत्री ने स्पष्ट किया कि वे फिलहाल किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत के पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले अनुभवों को देखते हुए वे इस समय सावधानी बरत रहे हैं।दूसरी ओर, संयुक्त राज्य अमेरिका ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है और हालात बेहतर दिशा में बढ़ रहे हैं। इन विरोधाभासी बयानों ने बाजार में भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है, जिससे निवेशकों का भरोसा प्रभावित हुआ है।
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तेल की कीमतों में इस तेजी का एक और बड़ा कारण होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति है। यह एक महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जहां से दुनिया के कुल तेल सप्लाई का लगभग 20% हिस्सा गुजरता है। अगर इस क्षेत्र में कोई भी बाधा आती है, तो वैश्विक सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है। इस बीच, अमेरिकी WTI क्रूड भी $91 प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। पिछले कुछ दिनों में बाजार में काफी उतार-चढ़ाव देखा गया है, जिससे अनिश्चितता का माहौल बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम नहीं होता, तब तक तेल की कीमतों में स्थिरता आना मुश्किल है। इसका असर सीधे आम लोगों पर भी पड़ सकता है, क्योंकि इससे पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि संभव है। यदि हालात और बिगड़ते हैं, तो वैश्विक अर्थव्यवस्था पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ऐसे में आने वाले दिनों में सभी की नजरें मिडिल ईस्ट के घटनाक्रम पर टिकी रहेंगी।
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