भारतीय सिनेमा में अब केवल बॉलीवुड ही नहीं, बल्कि दक्षिण भारतीय फिल्मों ने भी अपनी मजबूत पहचान बनाई है। हाल ही में रिलीज हुई तेलुगू फिल्म ‘ढंडोरा’ ने इसी बात को साबित किया है। IMDb पर 8.4 रेटिंग के साथ इस फिल्म ने दर्शकों और आलोचकों दोनों को प्रभावित किया है। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं करती, बल्कि सामाजिक संदेश भी देती है। ढंडोरा’ की कहानी 2004 के ग्रामीण भारत में घटित होती है, जहां जातिवाद और सामाजिक कुरीतियों की गहरी जड़ें मौजूद थीं। फिल्म की शुरुआत ही एक हृदयविदारक दृश्य से होती है, जिसमें एक बुजुर्ग महिला के शव को रस्सी से बांधकर अंतिम यात्रा पर भेजा जाता है। यह दृश्य दर्शकों को झकझोर देता है और सोचने पर मजबूर करता है कि समाज में सम्मान और मर्यादा के लिए कितनी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
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फिल्म का मुख्य केंद्र शिवाजी नामक प्रभावशाली जमींदार और उनका परिवार है। कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब उनकी बेटी सुजाता को रवि नामक युवक से प्यार हो जाता है, जो पिछड़ी जाति से ताल्लुक रखता है। जमींदार का अहंकार और गुस्सा कहानी को एक अप्रत्याशित मोड़ पर ले जाता है। इसके बाद की घटनाएँ दर्शकों को पूरी फिल्म के दौरान स्क्रीन से बांधे रखती हैं। अभिनय की दृष्टि से फिल्म अत्यंत प्रभावशाली है। शिवाजी ने कठोर जमींदार और पिता के द्वंद्व को बेहतरीन ढंग से पर्दे पर उतारा है। बिंदु माधवी, नवदीप और रवि कृष्ण ने अपने किरदारों के साथ पूरी न्याय किया है। फिल्म की पटकथा इतनी कसी हुई है कि इसमें बोरियत के लिए कोई जगह नहीं है।
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फिल्म का क्लाइमैक्स दर्शकों के लिए सबसे शॉकिंग और प्रभावशाली हिस्सा है। यह मोड़ इतना अप्रत्याशित है कि लंबे समय तक दर्शकों के दिमाग में रहता है। ‘ढंडोरा’ दर्शकों को सिर्फ मनोरंजन नहीं देती, बल्कि सामाजिक संदेश भी देती है, और जातिवाद और रसूख के संघर्ष को प्रभावशाली ढंग से पेश करती है। ओटीटी प्लेटफॉर्म पर जनवरी 2026 में रिलीज़ हुई इस फिल्म को आप अमेज़न प्राइम वीडियो पर देख सकते हैं। कहानी की गहराई, दमदार अभिनय और शॉकिंग क्लाइमैक्स इसे देखने योग्य बनाते हैं।
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