जब देश में एलपीजी की कमी की खबरें सामने आ रही थीं, तब समुद्र के बीच एक ऑपरेशन चुपचाप राहत की कहानी लिख रहा था। भारतीय जहाज “नंदा देवी” 47 हजार टन एलपीजी लेकर वाडिनार पोर्ट के पास पहुंचा और यहीं से शुरू हुआ एक बड़ा सप्लाई मिशन। यह कोई सामान्य डिलीवरी नहीं थी। जहाज सीधे पोर्ट पर गैस उतारने के बजाय समुद्र के बीच ही दूसरे जहाज में ट्रांसफर कर रहा है। इस प्रक्रिया को मिड-सी ट्रांसफर कहा जाता है, जो समय और संसाधनों की बचत के लिए किया जाता है।
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इस गैस को दो हिस्सों में बांटा जाएगा। एक हिस्सा दक्षिण भारत के एन्नोर पोर्ट पहुंचेगा, जबकि दूसरा हिस्सा पूर्वी भारत के हल्दिया पोर्ट में उतारा जाएगा। इससे देश के अलग-अलग क्षेत्रों में गैस की आपूर्ति संतुलित हो सकेगी। इसी बीच मुंद्रा पोर्ट पर खड़ा “शिवालिक” जहाज भी इस मिशन का हिस्सा है। यह पहले 12 हजार टन गैस उतारेगा और फिर बाकी स्टॉक को समुद्र में ट्रांसफर करेगा। बाद में यह गैस दहेज पोर्ट और मैंगलोर के टर्मिनलों तक पहुंचेगी।
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यह पूरा ऑपरेशन सिर्फ एक डिलीवरी नहीं, बल्कि एक रणनीतिक कदम है, जो दिखाता है कि कैसे आधुनिक तकनीक और बेहतर योजना के जरिए बड़े संकटों से निपटा जा सकता है। ऊर्जा क्षेत्र के जानकार मानते हैं कि इस तरह के प्रयास भविष्य में देश को गैस की कमी जैसी समस्याओं से बचाने में मदद करेंगे। “नंदा देवी” का यह मिशन न सिर्फ राहत लेकर आया है, बल्कि यह भी दिखाता है कि चुनौतियों के बीच समाधान कैसे खोजे जाते हैं।
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