भारत में म्यूचुअल फंड निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत होता दिखाई दे रहा है। फरवरी महीने में इक्विटी म्यूचुअल फंड योजनाओं में निवेश बढ़कर 25,978 करोड़ रुपये तक पहुंच गया, जो जनवरी के मुकाबले लगभग 8 प्रतिशत अधिक है। यह जानकारी Association of Mutual Funds in India (AMFI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों में सामने आई है।
आंकड़ों के अनुसार जनवरी में इक्विटी म्यूचुअल फंड में 24,028 करोड़ रुपये का निवेश हुआ था, जबकि फरवरी में यह बढ़कर 25,978 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इस बढ़ोतरी के साथ म्यूचुअल फंड उद्योग का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM भी बढ़कर करीब 82 लाख करोड़ रुपये हो गया, जो जनवरी में लगभग 81 लाख करोड़ रुपये था।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की मजबूत आर्थिक संभावनाओं और वैश्विक निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी के कारण इक्विटी बाजार में निवेश बढ़ रहा है। Venkat N Chalasani, जो Association of Mutual Funds in India के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं, का कहना है कि भारत और United States के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते ने निवेशकों के भरोसे को मजबूत किया है।
हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में जारी तनाव, खासकर Iran, Israel और अन्य देशों से जुड़ी परिस्थितियां भविष्य में बाजार में कुछ अस्थिरता पैदा कर सकती हैं। इसके बावजूद लंबी अवधि में भारत की आर्थिक विकास यात्रा को मजबूत माना जा रहा है।
यदि अलग-अलग इक्विटी फंड कैटेगरी की बात करें तो फरवरी में सबसे ज्यादा निवेश फ्लेक्सी कैप फंड में आया। इस कैटेगरी में लगभग 6,924.65 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश दर्ज किया गया। इसके बाद मिड कैप फंड में करीब 4,003 करोड़ रुपये और स्मॉल कैप फंड में 3,881 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला।
सेक्टोरल और थीमैटिक फंड्स में भी निवेशकों ने रुचि दिखाई और यहां 2,987 करोड़ रुपये का निवेश दर्ज हुआ। वहीं लार्ज कैप फंड्स में लगभग 2,112 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।
हालांकि सभी कैटेगरी में बढ़ोतरी नहीं हुई। टैक्स सेविंग फंड यानी ELSS योजनाओं में लगभग 650 करोड़ रुपये का शुद्ध आउटफ्लो दर्ज किया गया। इसका मतलब है कि कुछ निवेशकों ने इस अवधि में मुनाफावसूली की या टैक्स बचत के लिए निवेश में कमी की।
कुल मिलाकर फरवरी में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में 94,530 करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश हुआ। हालांकि यह जनवरी के 1.56 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले कम रहा।
