होलिका दहन कब है दो या तीन मार्च को ये होगी चंद्र ग्रहण और भद्रा से मुक्त तारीख

आचार्य पंडित सुधांशु तिवारी प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ/ ज्योतिषाचार्य
आचार्य पंडित सुधांशु तिवारी
प्रश्न कुण्डली विशेषज्ञ/ ज्योतिषाचार्य

हर साल फाल्गुन पूर्णिमा पर होलिका दहन किया जाता है और अगले दिन यानी चैत्र कृष्ण प्रतिपदा पर रंग वाली होली खेली जाती है. इस साल होली की तारीख को लेकर लोग बहुत कन्फ्यूज हैं। कोई 2 मार्च तो कोई 3 मार्च को होलिका दहन बता रहा है। दरअसल, यह सारी कनफ्यूजन भद्रा काल और चंद्र ग्रहण के कारण हो रही है। हिंदू पंचांग के अनुसार, 2 मार्च को भद्रा काल लगने वाला है। जबकि 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण रहेगा ।

क्या रहेगी होलिका दहन की सही डेट?

ज्योतिषाचार्य पंडित सुधांशु तिवारी जी के मुताबिक, इस बार होलिका दहन 2 मार्च यानी आज करना सही होगा होलिका दहन प्रदोष काल में करना सबसे शुभ माना जाता है इसी वजह से 2 मार्च यानी आज शाम 6 बजकर 22 मिनट से रात 8 बजकर 53 मिनट के बीच होलिका दहन करना उत्तम रहेगा 3 मार्च को होलिका दहन करना उचित इसलिए नहीं होगा क्योंकि इस दिन चंद्र ग्रहण लग रहा है 4 मार्च को रंग वाली होली यानी धुलंडी खेली जाएगी।

आज भद्रा रहित किस मुहूर्त में होगा होलिका दहन?

ज्योतिषाचार्य पंडित सुधांशु तिवारी के मुताबिक, फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट पर होगी, जो 3 मार्च को शाम 4 बजकर 33 मिनट तक रहेगी इस प्रकार 2 मार्च को निशाव्यापिनी पूर्णिमा प्राप्त हो रही है. हालांकि, 2 मार्च को शाम 5 बजकर 18 मिनट से भद्रा लग रही है, इसलिए भद्रा के मुख काल को त्यागकर, भद्रा पूंछ काल में रात 12 बजकर 50 मिनट से रात 2 बजकर 02 मिनट तक होलिका दहन करना शास्त्र सम्मत माना जा रहा है।

क्या 3 मार्च को भी किया जा सकता है होलिका दहन?

दरअसल, होलिका दहन की तिथि को लेकर अन्य ज्योतिषाचार्यों ने भी मत दिए हैं जिसमें अयोध्या के बड़े डाॅ गिरीश चन्द्र तिवारी ने बताया कि होलिका दहन की सही तिथि क्या होनी चाहिए उनके मुताबिक, 2 मार्च को प्रदोष काल में पूर्णिमा तो है और शाम के समय चंद्रमा का उदय भी होगा, लेकिन उस समय भद्रा भी लगी रहेगी, जो शुभ नहीं मानी जाती है वहीं, 3 मार्च को भद्रा नहीं है, लेकिन उस दिन प्रदोष काल में पूर्णिमा नहीं मिल रही, क्योंकि पूर्णिमा तिथि खत्म हो रही है ऐसे में सभी नियमों को ध्यान में रखते हुए यह माना जा रहा है कि 3 मार्च को भद्रा रहित समय में होलिका दहन करना ज्यादा सही रहेगा भले ही उस दिन प्रदोष काल न मिले, लेकिन सुबह की पूर्णिमा होने की वजह से शास्त्र इसकी अनुमति देते हैं।

4 मार्च को क्यों खेली जाएगी होली?

वैसे तो, ज्योतिषाचार्यों के मुताबिक, होलिका दहन के ठीक अगले दिन होली का पर्व मनाया जाता है लेकिन, इस बार होलिका दहन के ठीक अगले दिन यानी 3 मार्च को साल का पहला चंद्र ग्रहण लगने जा रहा है 3 मार्च को चंद्रग्रहण और सूतक काल होने के कारण उस दिन होली खेलना संभव नहीं होगा इसी वजह से 4 मार्च को रंगभरी होली खेली जाएगी । यह चंद्रग्रहण 3 मार्च को दोपहर 3 बजकर 21 मिनट से शुरू होकर शाम 06 बजकर 46 मिनट तक रहेगा, जो कि भारत में भी दृश्यमान होगा 3 मार्च की शाम को लगने जा रहे इस चंद्र ग्रहण का सूतक काल सुबह 6 बजकर 20 मिनट से शुरू होकर शाम 6 बजकर 46 बजे तक रहेगा ऐसे में रंगभरी होली 4 मार्च 2026, बुधवार को ही खेली जाएगी।

कहां कहां दिखाई देगा चंद्रग्रहण?

3 मार्च को लगने जा रहा यह चंद्रग्रहण भारत के अलावा पूर्वी एशिया, ऑस्ट्रेलिया, प्रशांत महासागर और अमेरिका में भी दिखाई देगा ऐसे में पूरे भारत में होली का पर्व 4 मार्च 2026 को ही मनाया जाना उचित रहेगा होलिका दहन 2 मार्च 2026 को भद्रा पूंछ काल में, रात 12 बजकर 50 मिनट के बाद करना ही शास्त्र सम्मत माना जा रहा है।

होलिका दहन की परंपरा

भारतीय नववर्ष का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से माना जाता है इसके पहले बीते वर्ष को विदा करने और उसकी नकारात्मकता को समाप्त करने के लिए चैत्र कृष्ण प्रतिपदा को होलिका दहन किया जाता है कई स्थानों पर इसे ‘संवत जलाना’ भी कहा जाता है यह अनुष्ठान बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है मान्यताओं के अनुसार, इस दिन पेड़ों की लकड़ियों को चौक-चौराहों पर स्थापित कर उसके चारों ओर उपले या कंडे सजाए जाते हैं फिर शुभ मुहूर्त में अग्नि प्रज्वलित की जाती है इसमें छिद्र वाले गोबर के उपले, नए गेहूं की बालियां और उबटन भी अर्पित किए जाते हैं ताकि सालभर उत्तम स्वास्थ्य और सुख-समृद्धि बना रहे आखिर में होलिका दहन की राख को घर लाकर घर के सदस्यों का तिलक किया जाता है।

होलिका दहन के लाभ

ऐसी मान्यता है कि होलिका दहन के अनुष्ठान से मानसिक परेशानियों में कमी आती है रोग, कष्ट और विरोधियों से जुड़ी बाधाओं से राहत मिलती है आर्थिक अड़चनें दूर होने और समृद्धि के मार्ग खुलने की कामना से भी होलिका दहन किया जाता है श्रद्धा से किए गए इस पूजन से ईश्वर की कृपा बनी रहती है होलिका दहन की अग्नि में कुछ खास चीजों की आहुति देने से जीवन की तमाम बाधाएं दूर की जा सकती हैं।

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