गरजे योगी, कहा-बीमारू राज्य से आज विकसित राज्य की ओर बढ़ा यूपी

up has moved from bimaru state to path of a developed state cm yogi adityanath
  • सूबे में महिलाएं नहीं थी सुरक्षित, व्यापारी कर रहे थे आत्महत्या
  • डबल इंजन सरकार ने नौजवानों को नई पहचान देने का किया है काम
  • कहीं योगी ने संकेतों में दिया बड़ा संदेश या फिर विपक्ष को घेरने की कवायद
  • SIR जैसे जटिल मुद्दे पर योगी ने रखा सरकार का पक्ष, कहा-निर्वाचन आयोग की कार्यवाही

विजय पांडेय

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक कार्यक्रम के दौरान विपक्षी दलों पर तीखा हमला बोलते हुए अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के नेताओं अखिलेश यादव और राहुल गांधी को सकारात्मक सोच के लिए तैयार करना कठिन है, क्योंकि उनकी राजनीति नकारात्मकता पर आधारित रही है। सीएम योगी एक कार्यक्रम में विपक्षियों पर न केवल गरजे, बल्कि आज जमकर बरसे भी। उन्होंने SIR से लेकर कई मुद्दों पर बड़ी बेबाकी से उत्तर दिया और विपक्ष को घेरते रहे। यूपी के वजीर-ए-आला ने प्रदेश और देश की राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए विपक्ष पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि ‘बुलडोज़र’ और ‘ब्रह्मोस’ एक-दूसरे के पूरक हैं। जहां बुलडोज़र यूपी की सख्त प्रशासनिक व्यवस्था और कानून के राज का प्रतीक है, जबकि ब्रह्मोस भारत की सामरिक शक्ति और सुरक्षा क्षमता को दर्शाता है। वहीं मुख्यमंत्री ने दावा किया कि वर्ष 2027 में उत्तर प्रदेश में फिर से डबल इंजन सरकार बनने जा रही है और प्रदेश को उसकी पहचान वापस दिलाने का काम जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य की समन्वित सरकार के कारण विकास कार्यों में तेजी आई है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पहले उत्तर प्रदेश को ‘बीमारू राज्य’ कहा जाता था। उनके अनुसार उस समय व्यापारी असुरक्षा के कारण परेशान थे, भूमाफिया सक्रिय थे और आम लोगों की जमीनों पर कब्जे की घटनाएं सामने आती थीं। उन्होंने दावा किया कि महिलाएं शाम के समय सुरक्षित महसूस नहीं करती थीं और किसान भी कई समस्याओं से जूझ रहे थे। योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कांग्रेस और समाजवादी पार्टी को आजादी के बाद लंबे समय तक प्रदेश में शासन का अवसर मिला, लेकिन प्रदेश की उर्वर भूमि होने के बावजूद किसान कर्ज के बोझ तले दबता गया और कई मामलों में आत्महत्या के लिए मजबूर हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि एमएसएमई इकाइयां बंदी के कगार पर थीं और युवा वर्ग निराशा का सामना कर रहा था।
सीएम ने कहा कि उनकी सरकार बनने के बाद प्रदेश में कानून व्यवस्था मजबूत हुई है। उन्होंने दावा किया कि अब प्रदेश में कर्फ्यू और दंगों जैसी स्थिति नहीं बनती और व्यापारियों व आम नागरिकों में सुरक्षा की भावना बढ़ी है। मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि सूबे में करीब 50 लाख करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव आए हैं और अब तक करीब 15 लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं ग्राउंड ब्रेकिंग समारोहों के माध्यम से धरातल पर उतारी जा चुकी हैं। उन्होंने इसे प्रदेश की अर्थव्यवस्था और रोजगार के लिए बड़ा बदलाव बताया। मुख्यमंत्री के इस बयान को आगामी चुनावी माहौल के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां सरकार विकास और कानून व्यवस्था को प्रमुख मुद्दा बनाकर जनता के बीच जा रही है, जबकि विपक्ष इन दावों पर लगातार सवाल उठा रहा है। सीएम योगी ने कहा कि ‘जैसी दृष्टि, वैसी सृष्टि’। पहले प्रदेश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर खराब धारणा थी, लेकिन पिछले नौ वर्षों में कानून व्यवस्था में बड़ा सुधार हुआ है। उनकी दृष्टि कभी देश और प्रदेश के लिए सकारात्मक नहीं रही। उन्होंने दावा किया कि इस अवधि में प्रदेश में कोई बड़ा दंगा नहीं हुआ और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है। मुख्यमंत्री ने बताया कि आगरा के संग्रहालय का नाम बदलकर छत्रपति शिवाजी महाराज के नाम पर रखा गया है, जिसे सांस्कृतिक विरासत के सम्मान की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 में प्रदेश का बजट करीब 3 लाख करोड़ रुपये था, जो अब बढ़कर 9,12,600 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसे उन्होंने विकास और आर्थिक मजबूती का संकेत बताया। मुख्यमंत्री के इन बयानों को आगामी चुनावी माहौल में राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है, जहां सत्ता पक्ष अपनी उपलब्धियों को प्रमुख मुद्दा बना रहा है, जबकि विपक्ष इन दावों पर सवाल उठा रहा है।
विपक्ष उठा रहा मनगढ़ंत मुद्दा मतदाता सूची को लेकर उठ रहे सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नाम हटाने या संशोधन की प्रक्रिया सरकार नहीं, बल्कि भारतीय निर्वाचन आयोग की नियमित कार्यवाही का हिस्सा है। उनके अनुसार लगभग 46–47 लाख नाम ऐसे हैं, जो “DEBT” श्रेणी में चिन्हित किए गए हैं और यह पूरी तरह निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया है। सीएम ने सपा मुखिया पर निशाना साधते हुए कहा कि उनके लिए परिवार ही सबसे बड़ा केंद्र रहा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि “PDA का मतलब परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी बन गया है। उन्होंने अखिलेश पर कटाक्ष करते हुए कहा कि यदि वे संघ की शाखाओं में जाएं तो उन्हें अनुशासन और जल्दी उठने की आदत हो जाएगी। इसके अलावा सीएम ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ भारत की आजादी का मंत्र और राष्ट्रगीत है, जिसने पूरे देश को जोड़ने का काम किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्रगीत, राष्ट्रगान और राष्ट्रध्वज का सम्मान करना हर नागरिक का कर्तव्य है और इनका अपमान संविधान का अपमान है।
‘बुलडोज़र और ब्रह्मोस: शक्ति, सुरक्षा और पहचान की राजनीति’
मौजूदा राजनीति में प्रतीकों की भूमिका लगातार मजबूत होती जा रही है। हाल के वर्षों में ‘बुलडोज़र’ और ‘ब्रह्मोस’ दो ऐसे प्रतीक बनकर उभरे हैं, जिन्हें सत्ता पक्ष विकास, कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा से जोड़कर पेश कर रहा है। बुलडोज़र को यूपी में सख्त कानून व्यवस्था और अपराध के खिलाफ कार्रवाई के प्रतीक के रूप में प्रचारित किया गया है। राज्य सरकार का दावा है कि अवैध कब्जों और माफिया तंत्र पर कार्रवाई ने प्रदेश में शासन की सख्ती और प्रशासनिक नियंत्रण का संदेश दिया है।

हीरो वाजपेयी, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता
हीरो वाजपेयी, भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता

बीजेपी प्रवक्ता हीरो वाजपेयी कहते हैं कि यह सूबे की नई पहचान और मजबूत प्रशासनिक इच्छाशक्ति का संकेत है। दूसरी ओर ‘ब्रह्मोस’ सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल भारत की सामरिक शक्ति और रक्षा क्षमता का प्रतीक मानी जाती है। भारत की रक्षा तैयारी और आत्मनिर्भरता के बढ़ते प्रयासों के बीच ब्रह्मोस को देश की सैन्य ताकत और वैश्विक स्तर पर बढ़ती रणनीतिक स्थिति से जोड़कर देखा जा रहा है।

वरिष्ठ पत्रकार अशोक राजपुत कहते हैं कि इन दोनों प्रतीकों के जरिए कानून व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा दोनों मुद्दों को एक साथ जोड़ने की कोशिश की जा रही है। यही कारण है कि आने वाले चुनावों को लेकर सत्ता पक्ष ‘डबल इंजन सरकार’ की अवधारणा को फिर से केंद्र में ला रहा है, जिसमें केंद्र और राज्य की समान राजनीतिक नेतृत्व वाली सरकारों को विकास के लिए जरूरी बताया जाता है। हालांकि विपक्ष इन दावों पर सवाल भी उठाता रहा है और इसे चुनावी नैरेटिव का हिस्सा बताता है। लेकिन यह स्पष्ट है कि 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की राजनीति में पहचान, सुरक्षा और प्रशासनिक सख्ती जैसे मुद्दे प्रमुख भूमिका निभाने वाले हैं।
वहीं राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि योगी कहीं इशारे-इशारे में कोई बड़ा संकेत तो नहीं दे रहे हैं। गौरतलब है कि योगी आदित्यनाथ के समर्थक पूरे देश में हैं और सभी उन्हें अपने प्रदेश का मुख्यमंत्री देखना चाहते हैं। लेकिन ऐसा सम्भव न मानकर उनके समर्थक उन्हें केंद्र में बड़ी भूमिका सौंप डालते हैं। राजनीति में प्रतीक केवल शब्द नहीं होते, बल्कि वे जनभावनाओं और राजनीतिक संदेश का माध्यम बन जाते हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि मतदाता इन प्रतीकों को किस नजर से देखते हैं और प्रदेश की दिशा तय करने में किसे प्राथमिकता देते हैं।

 

 

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