बंगाल में ‘वंदे मातरम’ बनाम ‘जन गण मन’ विवाद: क्या टैगोर के सम्मान पर छिड़ी सियासी जंग

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नया लुक डेस्क

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल में केंद्र सरकार के एक नए निर्देश ने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया है। गृह मंत्रालय द्वारा 28 जनवरी 2026 को जारी आदेश में आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगान जन गण मन’ से पहले राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम’ गाने या बजाने की बात कही गई है। साथ ही ‘वंदे मातरम’ के सभी छह छंद शामिल करने का प्रावधान भी किया गया है। इस फैसले को लेकर राज्य की राजनीति गरमा गई है, जहां सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) इसे गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के सम्मान से जोड़ रही है, वहीं भाजपा इसे राष्ट्रीय गीत की गरिमा बहाल करने का प्रयास बता रही है।

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क्या है केंद्र सरकार का नया निर्देश

नए निर्देश के अनुसार जहां भी दोनों गीत एक साथ प्रस्तुत किए जाएंगे, वहां ‘वंदे मातरम’ पहले गाया जाएगा और उसके बाद राष्ट्रगान होगा। अब तक प्रचलित व्यवस्था में 1937 में कांग्रेस और 1950 में संविधान सभा द्वारा स्वीकृत ‘वंदे मातरम’ के केवल पहले दो छंद ही गाए जाते थे। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत के शेष छंदों में देवी स्वरूप का उल्लेख होने के कारण पहले मुस्लिम समुदाय की आपत्तियों के बाद संक्षिप्त संस्करण अपनाया गया था।

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TMC का आरोपटैगोर का अपमान

तृणमूल कांग्रेस ने इस फैसले का तीखा विरोध किया है। राज्य के शिक्षा मंत्री ब्रात्य बसु ने कहा कि ‘जन गण मन’ के रचयिता रवींद्रनाथ टैगोर की विरासत को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। उनका आरोप है कि चुनाव से पहले भाजपा सांस्कृतिक मुद्दों को राजनीतिक हथियार बना रही है। TMC नेताओं का कहना है कि यह फैसला बंगाली अस्मिता के खिलाफ है और इसे राज्य की भावनाओं से जोड़कर चुनावी मुद्दा बनाया जा रहा है।

भाजपा का जवाब राष्ट्रीय गीत को सम्मान

भाजपा ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह कदम ‘वंदे मातरम’ की 150वीं वर्षगांठ के अवसर पर उसकी पूर्ण गरिमा बहाल करने के लिए उठाया गया है। पार्टी नेताओं के अनुसार ‘वंदे मातरम’ स्वतंत्रता आंदोलन का प्रेरणास्रोत रहा है और इसे पूरा गाना राष्ट्रीय सम्मान का विषय है।

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विपक्षी दलों की भी आलोचना

वामपंथी और कांग्रेस नेताओं ने भी इस निर्देश पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि यह फैसला बंगाल के दो महान सांस्कृतिक प्रतीकों टैगोर और बंकिम चंद्र के बीच अनावश्यक विवाद पैदा कर सकता है। कांग्रेस नेताओं ने इसे “विभाजन की राजनीति” करार दिया है।

मुस्लिम संगठनों का विरोध

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड और जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत कई मुस्लिम संगठनों ने भी आदेश का विरोध किया है। उनका कहना है कि ‘वंदे मातरम’ के कुछ छंद देश को देवी के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जो एकेश्वरवाद की धार्मिक मान्यताओं से टकराते हैं। धार्मिक नेताओं का तर्क है कि किसी भी नागरिक को धार्मिक आस्था के खिलाफ जाकर गीत गाने के लिए बाध्य करना संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत मिली धार्मिक स्वतंत्रता के विपरीत है।

चुनाव से पहले गरमाई सियासत

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले यह विवाद और तेज हो सकता है। TMC इसे ‘एंटी-बंगाली’ नैरेटिव के रूप में पेश कर रही है, जबकि भाजपा इसे सांस्कृतिक सम्मान और राष्ट्रवाद से जोड़ रही है। फिलहाल ‘वंदे मातरम’ बनाम ‘जन गण मन’ का यह विवाद सिर्फ सांस्कृतिक बहस नहीं, बल्कि बंगाल की चुनावी राजनीति का बड़ा मुद्दा बनता नजर आ रहा है, जिस पर आने वाले दिनों में सियासी तापमान और बढ़ने की संभावना है।

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