- संगीन धाराओं में पांच मुकदमा दर्ज है शहर कोतवाली में, लखनऊ में कितने मामले दर्ज हैं पुलिस कर रही जांच
- हिस्ट्रीशीटर था शोएब किदवई उर्फ बॉबी: SP
ए अहमद सौदागर
लखनऊ। बाराबंकी जिले के शहर कोतवाली इलाके के सफेदाबाद क्षेत्र स्थित असैनी मोड़ पर शुक्रवार को भरी दोपहरी में जिस तरह से असलहों से लैस शूटरों ने अधिवक्ता शोएब किदवई उर्फ बॉबी के ऊपर गोलियों की बौछार कर मौत की नींद सुलाया, इससे यही लग रहा है कि वर्चस्व, जमीन विवाद या फिर कोई और वजह को लेकर गहरी दुश्मनी थी। पुलिस वारदात के पीछे मुख्य रूप से दो-तीन बिंदुओं को लेकर छानबीन कर रही है। पुलिस की निगाहें पुराने सूचीबद्ध बदमाशों पर वर्चस्व की जंग, ठेके, रंगदारी और जमीन को लेकर उपजे विवाद पर टिकी है। स्थानीय पुलिस के अलावा क्राइम ब्रांच को भी हत्यारों की तलाश में लगा दिया गया है। असैनी मोड़ पर शोएब की हत्या के बाद पुलिस कई बिंदुओं पड़ताल कर रही है। सूत्र बताते हैं कि जमीन, ठेका, रंगदारी के अलावा ऊंची रसूख के चलते अन्य कामों में भी दखल था।
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कुछ साल पहले भी हाईसिक्योरिटी जोन में घटना को अंजाम देकर पुलिस को दिया था चुनौती
जानकार बताते हैं कि अधिवक्ता शोएब किदवई उर्फ बॉबी मुख्तार अंसारी का बेहद करीबी माना जाता था। यह भी बताया जा रहा है कि किसी समय में शोएब मुख्तार का शार्पशूटर था। कुछ साल पहले शोएब वकील के वेश में बाराबंकी कोर्ट में पहुंच गया था और पुलिस उसे काले कोट में ही थाने लेकर पहुंची थी।
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बाराबंकी के अलावा लखनऊ में भी दर्ज हैं मृतक शोएब के खिलाफ मुकदमा
बताया जा रहा है कि मुख्तार के करीबी माने जाने वाला शोएब भी माफिया अंसारी की तरह 0786 गाड़ियों से चलता था।
असैनी मोड़ पर दिनदहाड़े गोलियों से छलनी हुए शोएब जेलर हत्याकांड का भी मुख्य मास्टर माइंड बताया जा रहा है।
अपनी नाकामी छिपाने और पुलिस से बचने के लिए बाराबंकी अदालत में वकालत के पेशे में लग गया था। बताया जा रहा है कुछ वर्षों पहले राजधानी लखनऊ में राजभवन के सामने हुए जेलर हत्याकांड का भी मुख्य आरोपी था। यह भी बताया जा रहा है कुछ समय पहले बाराबंकी की शहर कोतवाली पुलिस ने शोएब को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया था।
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ऐसे हुई थी अपराध की दुनिया में एंट्री
बताया जा रहा है कि माफिया मुख्तार अंसारी का दौर था और तूती बोलती थी और विधायक रहते हुए मुख्तार सलाखों के पीछे पहुंचे थे तो तभी से शोएब की नजदीकियां और बढ़ गई थी। बताया जा रहा है कि मुख्तार की नजर में शोएब बहुत भरोसेमंद माना जाता था और उसके इशारे पर कईयों घटनाओं को अंजाम दे चुका था, लेकिन कड़वा सच यह है कि गोली से सफ़र शुरू होता है और गोली से ही अंत होता है।
गैंग छोड़ने के चक्कर में तो नहीं मारा गया शोएब
कहते हैं कि जुर्म की दुनिया में आने का रास्ता तो है लेकिन जाने का नहीं। कोतवाली बाराबंकी के हिस्ट्रीशीटर शोएब की हत्या को पुलिस इसी नजर से देख रही है। छोटी सी उम्र में उसने नाम कमाने के अपराध के दलदल में कूदकर माफिया मुख्तार अंसारी का दामन थाम नाम तो कमा लिया, लेकिन सूत्र बताते हैं कि बीते कुछ महीनों से वह गैंग से दूर भागने की कोशिश कर रहा था। यह भी चर्चा है कि गैंग ने एक बड़ी वारदात कर मोटी रकम बनाई और गैंग छोड़ने से पहले शोएब ने इस रकम का बड़ा हिस्सा ले गया। जांच-पड़ताल में जुटी पुलिस का कहना है कि इससे इन्कार नहीं किया जा सकता लिहाजा कई बिंदुओं पर गहनता से छानबीन की जा रही है।
