बॉलीवुड अभिनेता और कॉमेडियन राजपाल यादव एक बार फिर कानूनी मुश्किलों में घिर गए हैं। 9 करोड़ रुपये के चेक बाउंस मामले में उन्हें तिहाड़ जेल के अधिकारियों के सामने सरेंडर करना पड़ा। दिल्ली हाईकोर्ट में 12 फरवरी को उनकी जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान अदालत ने सख्त रुख अपनाया और भुगतान में देरी को लेकर सवाल उठाए।
सुनवाई के दौरान अदालत ने राजपाल यादव से पूछा कि जब उन्होंने खुद कर्ज लेने की बात स्वीकार की थी और भुगतान का आश्वासन दिया था, तो अब सजा को चुनौती क्यों दी जा रही है। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि कई मौकों के बावजूद रकम जमा नहीं की गई और आदेशों की अनदेखी के कारण ही उन्हें आत्मसमर्पण करना पड़ा।
राजपाल यादव के वकील ने दलील दी कि यह एक वास्तविक लेन-देन था और उनके मुवक्किल भुगतान करने के इच्छुक हैं। उन्होंने बताया कि मूल 5 करोड़ रुपये में से 3 करोड़ से अधिक राशि चुकाई जा चुकी है और शेष रकम के लिए 2.10 करोड़ रुपये जमा करने की तैयारी है। हालांकि, अदालत ने पूछा कि वर्षों तक भुगतान न करने की वजह क्या रही और क्यों बार-बार समय लेने के बावजूद कर्ज नहीं चुकाया गया।
कोर्ट ने यह भी कहा कि आरोपी को कई अवसर दिए गए, यहां तक कि मध्यस्थता केंद्र में भी समझौते की कोशिश की गई, लेकिन ठोस परिणाम सामने नहीं आए। जज ने टिप्पणी की कि सहानुभूति हो सकती है, परंतु कानून के दायरे में ही निर्णय लिया जाएगा।
मामला 2010 में शुरू हुआ था, जब राजपाल यादव ने अपनी फिल्म ‘अता पता लापता’ के निर्माण के लिए एक कारोबारी से 5 करोड़ रुपये का ऋण लिया था। फिल्म की असफलता के बाद कर्ज चुकाने में कठिनाई आई और ब्याज के साथ राशि बढ़कर करीब 9 करोड़ हो गई। 2018 में मामला कानूनी रूप से आगे बढ़ा और तब से यह विवाद अदालत में लंबित है।
इस कठिन दौर में फिल्म इंडस्ट्री के कई कलाकारों ने आर्थिक सहायता का हाथ बढ़ाया है। उनकी पत्नी ने सभी सहयोगियों का आभार व्यक्त किया है। फिलहाल अदालत में अगली सुनवाई के बाद ही राहत की स्थिति स्पष्ट होगी।
