लखनऊ । उत्तर प्रदेश में ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो रही वेब सीरीज ‘घूसखोर पंडत’ को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। ब्राह्मण समाज के तीखे विरोध और प्रदेशभर में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने इस मामले में सख्त कदम उठाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर लखनऊ के हजरतगंज थाने में वेब सीरीज के निर्देशक और उनकी टीम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि सामाजिक सौहार्द और शांति व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी कंटेंट को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकार की ओर से यह कार्रवाई जीरो टॉलरेंस नीति के तहत की गई है।
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SHO ने खुद दर्ज कराई FIR
हजरतगंज कोतवाली के एसएचओ विक्रम सिंह ने स्वयं इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कराई। पुलिस के अनुसार, वेब सीरीज का शीर्षक और इसकी विषयवस्तु एक विशेष जाति को लक्षित करती है, जिससे समाज में रोष और असंतोष फैल रहा है।
एफआईआर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की गई है, जिनमें—
धारा 196 : धर्म, जाति और भाषा के आधार पर वैमनस्य फैलाना
धारा 299 : जानबूझकर किसी वर्ग की भावनाएं आहत करना
धारा 352 : शांति भंग करने के इरादे से अपमान
धारा 353 : सार्वजनिक उपद्रव सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 शामिल हैं।
पुलिस को क्यों करनी पड़ी सख्ती
पुलिस का कहना है कि यह वेब सीरीज ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स पर रिलीज की जा रही थी। शिकायत में कहा गया है कि फिल्म का नाम सीधे तौर पर एक जाति विशेष को चिह्नित कर उसे अपमानित करता है। इससे न केवल सामाजिक सौहार्द बिगड़ने की आशंका है, बल्कि कई संगठनों द्वारा उग्र प्रदर्शन की चेतावनी भी दी गई थी। प्राथमिकी के अनुसार, अगर समय रहते कार्रवाई नहीं होती, तो प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ सकती थी।
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OTT कंटेंट पर उठे सवाल
इस मामले ने एक बार फिर ओटीटी प्लेटफॉर्म पर प्रसारित होने वाले कंटेंट की निगरानी को लेकर बहस छेड़ दी है। सवाल उठ रहे हैं कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर बिना किसी प्रभावी नियंत्रण के इस तरह का कंटेंट कैसे जारी किया जा रहा है।
सरकार का स्पष्ट संदेश
प्रदेश सरकार ने साफ कर दिया है कि समाज को बांटने या किसी भी वर्ग की भावनाएं आहत करने वाले कंटेंट के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।
