नई दिल्ली। नासा के महत्वाकांक्षी मून मिशन आर्टेमिस II पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं। चांद की परिक्रमा कराने वाले नए रॉकेट स्पेस लॉन्च सिस्टम (SLS) की अंतिम प्रैक्टिस काउंटडाउन के दौरान बड़ा तकनीकी झटका लगा, जब रॉकेट से हाइड्रोजन फ्यूल लीक होने की समस्या सामने आई। यह टेस्ट असली लॉन्च से पहले की सबसे अहम रिहर्सल मानी जा रही थी।
रॉकेट के निचले हिस्से में जमा हुआ खतरनाक हाइड्रोजन
फ्लोरिडा स्थित कैनेडी स्पेस सेंटर में दिनभर चले फ्यूलिंग ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद रॉकेट के निचले हिस्से में भारी मात्रा में हाइड्रोजन जमा हो गई। हालात बिगड़ते देख लॉन्च टीम ने कम से कम दो बार फ्यूल भरने की प्रक्रिया रोकी। नासा ने 2022 के आर्टेमिस I मिशन के दौरान विकसित तकनीकों का सहारा लेकर लीक को नियंत्रित करने की कोशिश की। उस समय भी इसी तरह की समस्या ने रॉकेट को महीनों तक लॉन्च पैड पर रोक दिया था।
700,000 गैलन सुपर-ठंडा फ्यूल भरा गया
करीब 322 फुट लंबे (98 मीटर) इस विशाल रॉकेट में 7 लाख गैलन से ज्यादा सुपर-ठंडा लिक्विड हाइड्रोजन और ऑक्सीजन भरी गई। यह प्रक्रिया असली लॉन्च के अंतिम चरणों की नकल थी। हालांकि लीक के बावजूद नासा ने रॉकेट को पूरी तरह फ्यूल कर दिया और बाद में इसे रिप्लेनिश मोड में डाल दिया। एजेंसी का कहना है कि रिसाव स्वीकार्य सीमा के भीतर रहा।
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तय समय पर लॉन्च नहीं हुआ तो मार्च तक टल सकता है मिशन
इस ऐतिहासिक मिशन के लिए चुने गए चार अंतरिक्ष यात्री… रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर, क्रिस्टिना कोच और कनाडा के जेरेमी हेंसन ह्यूस्टन के जॉनसन स्पेस सेंटर से इस पूरे टेस्ट पर नजर रख रहे थे और पिछले डेढ़ हफ्ते से क्वारंटाइन में थे। नासा 8 फरवरी से लॉन्च की कोशिश कर सकता है, लेकिन अगर रॉकेट 11 फरवरी तक उड़ान नहीं भर पाया, तो मिशन को मार्च तक टालना पड़ सकता है।
चांद के चारों ओर उड़ान, लेकिन लैंडिंग नहीं
यह लगभग 10 दिन का मिशन चांद के बेहद करीब से गुजरेगा, उसकी दूर वाली सतह के चारों ओर घूमेगा और फिर सीधे पृथ्वी लौट आएगा। इसका मुख्य उद्देश्य ओरियन कैप्सूल के लाइफ सपोर्ट सिस्टम और अन्य अहम तकनीकों का परीक्षण करना है। इस मिशन में न तो चांद की कक्षा में रुकने की योजना है और न ही लैंडिंग की।
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भविष्य के चंद्र मिशनों की नींव बनेगा आर्टेमिस प्रोग्राम
आर्टेमिस मिशन के जरिए नासा आधी सदी बाद फिर इंसानों को चांद तक पहुंचाने की तैयारी कर रहा है। अपोलो कार्यक्रम के बाद यह पहला मानवयुक्त चंद्र अभियान होगा, जो भविष्य में चांद पर स्थायी मौजूदगी और मंगल मिशन की राह खोलेगा।
